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स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप की संगीतमय शाम में गूंजे सदाबहार फिल्मी गीत, कलाकारों ने बांधा समां

लखनऊ। स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप की ओर से आयोजित सदाबहार हिंदी फिल्मी गीतों की संगीतमय शाम में कलाकारों ने अपनी शानदार गायकी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। पुराने हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतों, सुरीली आवाजों और मनमोहक युगल प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से संगीत के स्वर्णिम दौर की यादें ताजा कर दीं।

कार्यक्रम में सोलो और युगल गीतों की शानदार प्रस्तुतियों का सिलसिला देर तक चलता रहा। राकेश श्रीवास्तव ने ‘जब मोहब्बत जवां होती है’ गीत प्रस्तुत किया और अर्चना श्रीवास्तव के साथ ‘ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं’ युगल गीत सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। सलीम अब्बासी और वंदना श्रीवास्तव ने ‘परदेसिया ये सच है पिया’ प्रस्तुत किया। अनिल सचान ने ‘महका-महका रूप तुम्हारा’ तथा वंदना श्रीवास्तव के साथ ‘मेहंदी लगा के रखना’ गीत सुनाया।

मुकेश श्रीवास्तव ने ‘और क्या अहदे वफा होता है’ और अर्चना जायसवाल के साथ ‘दीवाना मस्ताना हुआ दिल’ प्रस्तुत किया। अशोक यादव ने ‘याद आ रही है, तेरी याद आ रही है’ तथा अर्चना जायसवाल के साथ ‘हो गया है मुझको तो प्यार सजना’ गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेमनाथ पाण्डेय ने ‘मैंने शायद तुम्हें पहले भी कहीं देखा है’ और ‘टूटे हुए ख्वाबों ने हमको ये सिखाया है’ जैसे लोकप्रिय गीत सुनाए।

प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने ‘ये दिल मोहब्बत का प्यासा’ और प्रीति लाल के साथ ‘वो जब याद आए’ गीत प्रस्तुत किया। अनिल श्रीवास्तव ने ‘इक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया’ तथा ‘तुम अगर साथ देने का वादा करो’ गीतों से अपनी गायकी का परिचय दिया। अरविंद मित्तल ने ‘तुम अगर साथ देने का’ और अनीता सिन्हा के साथ ‘मुझको अपने गले लगा लो’ गीत सुनाया।

विजय सक्सेना ने ‘चिंगारी कोई भड़के’ और ‘वो शाम कुछ अजीब थी’ प्रस्तुत किए, जबकि विनय कुमार ने ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत’ तथा अनीता सिन्हा के साथ ‘इशारों-इशारों में दिल लेने वाले’ गीत गाया। राजेन्द्र सिंह ने ‘सीने में दिल है, दिल में धड़कन’ और ‘जिसके आने से रंगों में डूब गई है शाम’ गीतों से माहौल को संगीतमय बनाया।

अवनीश कौसर ने ‘तेरे मेरे बीच में’ तथा अर्चना जायसवाल के साथ ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’ प्रस्तुत किया। नितिन श्रीवास्तव ने ‘तुम्हारी भी जय हो, हमारी भी जय-जय’ और अर्चना श्रीवास्तव के साथ ‘सागर किनारे दिल ये पुकारे’ गीत सुनाया। प्रयागराज से विशेष रूप से पहुंचे हेमंत ने ‘मिले न फूल तो कांटों से दोस्ती कर ली’ तथा वंदना श्रीवास्तव के साथ ‘कोरा कागज था ये मन मेरा’ गीत प्रस्तुत कर खूब सराहना प्राप्त की।

विनोद वर्मा ने ‘थोड़ी सी जो पी ली है’ और प्रीति लाल के साथ ‘जरा सा झूम लूं मैं’ गीत गाया। संजय कन्नौजिया ने ‘इक न इक दिन कहानी बनेगी’ और ‘गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं’ से श्रोताओं का मनोरंजन किया। ए.के. श्रीवास्तव ने ‘परदे में रहने दो’ तथा अर्चना श्रीवास्तव के साथ ‘दिल लेने की रुत आई’ गीत प्रस्तुत किया। ज्ञानेंद्र कुमार ने ‘मुझे इश्क है तुम्हीं से’ और वंदना श्रीवास्तव के साथ ‘ये आंखें देखकर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं’ सुनाया।

शिव वर्मा ने ‘कितने सपने, कितने अरमान’ और प्रीति लाल के साथ ‘जुनली रात मा’ गीत प्रस्तुत किया। सुनील कुमार दुबे ने ‘रूप तेरा मस्ताना’ और ‘हां, पहली बार’ जैसे गीतों से समां बांधा। फैजल खान ने ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार’ तथा प्रीति लाल के साथ ‘कागज, कलम, दवात ला’ प्रस्तुत किया। विजय और माधुरी ने भी अपनी संयुक्त प्रस्तुति से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। विजय ने ‘मेरे नैना सावन भादो’ और माधुरी ने ‘किसी राह पे, किसी मोड़ पे’ गीत सुनाया।

आर.के. गुप्ता ने ‘मधुबन में राधिका नाचे रे’ और ‘तू गंगा की मौज में जमुना’ जैसे सदाबहार गीत प्रस्तुत किए। महमूद अली ने मोहम्मद रफी के लोकप्रिय गीतों का मेडले और ‘परदा है परदा’ सुनाकर संगीत प्रेमियों को पुराने दौर की यादों में पहुंचा दिया। बीना ने ‘तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया’ तथा ‘तुम्हीं मेरी मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा’ प्रस्तुत किया। राखी चड्ढा ने ‘बांहों में चले आओ’ और रविंद्र श्रीवास्तव ने ‘ये जिंदगी की महफिल, महफिल में हम अकेले’ गीत सुनाकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

अरविंद मित्तल को मिला अर्ली बर्ड सम्मान

कार्यक्रम के दौरान समय से पहुंचकर सहभागिता करने के लिए अरविंद मित्तल को विशेष रूप से अर्ली बर्ड सम्मान प्रदान किया गया। आयोजकों ने उन्हें सम्मानित कर प्रोत्साहित किया।

नीलमणि लाल और प्रीति लाल ने किया स्वागत

कार्यक्रम के आयोजक नीलमणि लाल और प्रीति लाल ने सभी कलाकारों, अतिथियों एवं संगीत प्रेमियों का स्वागत किया तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगीत लोगों को आपस में जोड़ने और प्रेम, सौहार्द एवं सद्भाव बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।

स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप का यह आयोजन कलाकारों की प्रतिभा, संगीत के प्रति समर्पण और सामूहिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बना। सदाबहार फिल्मी गीतों से सजी इस शाम ने एक बार फिर साबित किया कि संगीत की मिठास उम्र और समय की सीमाओं से परे हर दिल को छूने की क्षमता रखती है।

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