अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों ने रामनगरी की धार्मिक और सांस्कृतिक छटा को निखारने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नई ऊर्जा भर दी है। 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने के लक्ष्य के साथ चल रही तैयारियों के बीच घाटों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। इसका सीधा लाभ चाय, समोसा, लाई-चना और झालमुड़ी बेचने वाले छोटे दुकानदारों को मिल रहा है। वहीं, सात नवंबर को सरयू तट पर 2100 से अधिक लोगों की सामूहिक महाआरती आयोजित करने की तैयारी है। दीपोत्सव के भव्य आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने भी प्रमुख स्थलों पर वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित कर दी हैं।
- दीपोत्सव की रौनक से छोटे दुकानदारों की कमाई में तीन गुना तक उछाल
दीपोत्सव की मुख्य तिथि से पहले ही राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर चहल-पहल बढ़ने लगी है। दीपोत्सव की तैयारियां देखने पहुंच रहे लोग घाटों पर कुछ समय बिताने के साथ चाय, समोसे और झालमुड़ी का स्वाद भी ले रहे हैं। इससे स्थानीय रेहड़ी-पटरी संचालकों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सामान्य दिनों में करीब 800 से 1000 रुपये प्रतिदिन कमाने वाले कुछ दुकानदारों की आमदनी इन दिनों बढ़कर 2800 से 3200 रुपये तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और शाम के समय घाटों पर जुटने वाली भीड़ छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर बन रही है।
गोंडा निवासी रोहित शुक्ला घाटों पर समोसे बेचते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में उनकी दैनिक कमाई 700 से 900 रुपये के आसपास रहती थी, लेकिन पिछले एक-दो दिनों से यह बढ़कर 2500 से 3000 रुपये तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से समोसों की बिक्री में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। इसी तरह अयोध्या के रुदौली निवासी रविन्द्र कुमार कनौजिया लाई-चना बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। दीपोत्सव की तैयारियों के बीच उनकी बिक्री और आमदनी में भी दो से तीन गुना तक वृद्धि हुई है। वहीं, सिकंदरपुर चौरी निवासी प्रेम कुमार भट्ट की चाय की दुकान पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। सामान्य दिनों में 700 से 800 रुपये कमाने वाले प्रेम कुमार की आमदनी इन दिनों दो से तीन गुना तक बढ़ गई है। स्थानीय दुकानदारों को उम्मीद है कि सात नवंबर को मुख्य आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ कारोबार में और तेजी आएगी।
- पर्यटन और विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और आधारभूत सुविधाओं के विकास ने स्थानीय कारोबार के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। दीपोत्सव जैसे बड़े आयोजन इस बदलाव को और गति दे रहे हैं। होटल, परिवहन और खानपान से जुड़े व्यवसायों के साथ घाटों पर छोटी दुकानें लगाने वाले कारोबारियों तक भी पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ पहुंच रहा है। दीपोत्सव की तैयारियों के दौरान छोटे दुकानदारों की बढ़ती आमदनी इस बात का उदाहरण है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंच सकता है। इससे छोटे कारोबारियों को अपनी आजीविका मजबूत करने का अवसर मिल रहा है।
- सरयू तट पर 2100 से अधिक लोग करेंगे सामूहिक महाआरती
दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में इस बार सरयू तट पर होने वाली सामूहिक आरती भी शामिल होगी। सात नवंबर को आयोजित होने वाली इस आरती में 2100 से अधिक लोगों के शामिल होने की तैयारी है। आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संस्कृत विद्यालयों के बटुक सरयू घाट पर नियमित रूप से आरती का पूर्वाभ्यास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होने वाले इस आयोजन में प्रतिभागी एकरूप वेशभूषा में निर्धारित क्रम और लय के साथ आरती करेंगे। इसमें अयोध्या के विभिन्न समुदायों की महिलाओं, समाजसेवी महिलाओं, संस्कृतिकर्मियों और संस्कृत का अध्ययन करने वाले बटुकों की सहभागिता रहेगी।
महापौर गिरीश पति त्रिपाठी के अनुसार, सामूहिक सरयू आरती के माध्यम से विभिन्न समुदायों को अयोध्या की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें दलित और निषाद समुदाय की महिलाओं सहित विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोग अपनी परंपराओं को जानने-समझने के साथ उनके संरक्षण में भी योगदान दे सकें। श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय के गुरु राजेश शुक्ला ने बताया कि सामूहिक आरती में विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के 700 से अधिक बटुक हिस्सा लेंगे। इसके लिए उन्हें नियमित अभ्यास कराया जा रहा है। आरती के दौरान बटुक निर्धारित क्रम में मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न करेंगे। बटुक प्रवीण मिश्रा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है। सामूहिक सरयू आरती अयोध्या की धार्मिक विरासत को समझने और आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
- प्रमुख स्थलों पर अधिकारियों की तैनाती, व्यवस्थाओं की निगरानी तेज
दीपोत्सव के कार्यक्रमों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुचारु ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने भी तैयारियों को गति दी है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने आठ नवंबर तक विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर मजिस्ट्रेटों की ड्यूटी निर्धारित की है। राम की पैड़ी, रामकथा पार्क, नया घाट, श्रीराम जन्मभूमि परिसर और अन्य प्रमुख स्थलों पर अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अपर जिलाधिकारी कौशल कुमार को अयोध्या एयरपोर्ट पर विशिष्ट महानुभावों के आगमन और प्रस्थान की व्यवस्थाओं के साथ शांति व्यवस्था सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। अपर नगर आयुक्त भारत और डिप्टी कलेक्टर गजेंद्र सिंह एयरपोर्ट से नया घाट होते हुए श्रीराम जन्मभूमि और आसपास के मार्गों पर आवश्यक व्यवस्थाओं तथा शांति व्यवस्था की निगरानी करेंगे। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट अमेठी सात्विक श्रीवास्तव को उप राष्ट्रपति के फ्लीट और संपूर्ण कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, श्री अयोध्या जी तीर्थ विकास परिषद के ओएसडी आशुतोष द्विवेदी रामकथा पार्क, राम की पैड़ी और अन्य स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा कलाकारों की लाइनअप की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित स्थलों पर उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर आपसी समन्वय से तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में दीपोत्सव को भव्य और दिव्य स्वरूप देने के लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं और सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- धार्मिक भव्यता के साथ जनभागीदारी और रोजगार का उत्सव
अयोध्या का दीपोत्सव केवल दीपों की जगमगाहट और धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय कारोबार, सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता को भी नई पहचान दे रहा है। एक ओर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारियां रामनगरी को भव्य स्वरूप देने में जुटी हैं, तो दूसरी ओर सरयू तट की सामूहिक महाआरती सांस्कृतिक एकजुटता का संदेश देने की तैयारी में है। घाटों पर छोटे दुकानदारों की बढ़ती कमाई और आयोजन की व्यवस्थाओं में जुटा प्रशासन इस व्यापक तैयारी के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं। दीपोत्सव के मुख्य आयोजन के साथ अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही स्थानीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को और गति देने की उम्मीद जगा रही है।
NAGARIK SATTA