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विमान दुर्घटनाओं में खोया नेतृत्व

अखिलेश पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार

आधुनिक भारत की प्रगति यात्रा में विमान और हेलीकॉप्टर गति, रणनीति और समय के सबसे भरोसेमंद साधन बने हैं। किंतु यही साधन कई अवसरों पर देश के लिए अपूरणीय क्षति का कारण भी बने। विमान दुर्घटनाएँ केवल तकनीकी विफलताएँ नहीं होतीं वे राष्ट्र की राजनीतिक, वैज्ञानिक और सामरिक दिशा को अचानक बदल देने वाली त्रासद घटनाएँ होती हैं। भारत के इतिहास में ऐसे अनेक क्षण दर्ज हैं, जब आसमान ने देश से उसके महत्वपूर्ण नेतृत्व को छीन लिया।

अजित पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे विमान हादसे में आज उनकी मौत हो गई। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राजनेता थे लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री का पदभार संभाल लिया। वह महाराष्ट्र विधानसभा में नेता थे और मंत्री के रूप में अपने नवीनतम कार्यकाल में महाराष्ट्र के 8वें उपमुख्यमंत्री थे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने के अलावा वह महाराष्ट्र के वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। बुधवार को 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक चुनावी रैली को सम्बोधित करने जा रहे थे जहा विमान दुर्घटना में अजित पवार का निधन हो गया।

इसी तरह विमान हादसे में ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के नेता संजय गांधी भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के छोटे पुत्र थे। भारत में आपातकाल के समय उनकी भूमिका बहुत विवादास्पद रही। अल्पायु में ही एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गयी। इनका जन्म 14 दिसम्बर 1946 को हुआ था। बताया जाता है कि संजय गांधी भले ही देश के प्रधानमंत्री न बने सके मगर सदैव ही पद की लालसा रखते थे। वहीं इंदिरा गांधी भी चाहती थी कि उनके कार्यकाल के बाद संजय ही देश के प्रधानमंत्री बने इस बात की झलक उनकेे आपातकाल लगाये जाने के समयकाल में देखने को मिली। दिसम्बर 1973 में संजय गांधी मुलाकात मेनिका गांधी से हुयी दोनो ने 23 दिसम्बर 1974 को शादी कर ली। शादी के 6 साल बाद 21 जून 1980 की सुबह संजय गांधी एवं दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पूर्व इंस्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना के दिल्ली फ्लाइंग क्लब से उड़ान भरी। हवा में काफी उंचाई पर जाने के बाद विमान का पिछला इंजन काम करना बंद दिया। परिणास्वरुप विमान अनियंत्रित होकर अशोक होटल के पिछे खाली पड़ी जमीन में क्रैश होता है। इस प्रकार 23 जून 1980 में संजय गांधी की मौत हो गयी। 1980 में संजय गांधी का असामयिक निधन केवल एक युवा नेता की मृत्यु नहीं थी, बल्कि वह दौर की राजनीति में एक अचानक आया शून्य था। संजय गांधी की राजनीति विरासत उनकी पत्नी मोनिका गांधी व पुत्र वरूण गांधी बखुबी निभा रहे हैं। उनकी आकांक्षाएँ, उनकी भूमिका और सत्ता-संतुलन सब कुछ एक क्षण में समाप्त हो गया।

2001 में माधवराव सिंधिया के विमान हादसे ने भारतीय राजनीति को संतुलन और सौम्यता से वंचित कर दिया। माधवराव सिंधिया का जन्म मार्च 1945 को मुंबई में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में मंत्री थे। 1961 में अपने पिता जीवाजी राव की मृत्यु के बाद ग्वालियर के अंतिम नाममात्र के महाराज बने। 1971 में भारत के संविधान में 26 वें संशोधन के बाद भारत सरकार ने रियासतों के सभी आधिकारिक प्रतीकों को समाप्त कर दिया। राजशाही का अंत होने के बाद माधव राव सिंधिया ने गुना से चुनाव लड़ा। उन्होंने 1971 में पहली बार चुनाव जीता तब वे महज 26 साल के थे। जिसके बाद वे एक भी चुनाव नहीं हारे। वे लगातार नौ बार लोकसभा के सांसद रहे। 1984 में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी को ग्वालियर से चुनाव हराया था। वे 1990 से 1993 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। उनकी मृत्यु 30 सितंबर 2001 को एक रैली को संबोधित करने के लिए दिल्ली से कानपुर जाते वक्त मैनपुरी (यूपी) में एक हवाई जहाज दुर्घटना में हुई थी। यह एक निजी विमान था। इस विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था। इसमें सवार सभी आठ व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी थी। एक निजी विमान दुर्घटना ने उस नेतृत्व को समाप्त कर दिया, जिसे भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति का केंद्रीय स्तंभ माना जा रहा था।

लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी का 2002 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन संसदीय लोकतंत्र के लिए गहरा आघात था। एक छोटे से गाँव में पले बढ़े बालायोगी को अपनी प्राथमिक शिक्षा के लिए जी. वेमावरम गाँव जाना पड़ता था। उन्होंने काकीनाडा से स्नातकोत्तर और विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की। हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु के समय वे 12वीं लोकसभा के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। 3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के कैकलूर में एक बेल 206 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में बालायोगी की मृत्यु हो गई। उनके निधन ने यह साबित कर दिया कि विमान हादसे में वीआईपी हों या आम नागरिक कोई सुरक्षित नहीं है।

डॉक्टर येदुगुड़ी संदिंती राजशेखर रेड्डी वाईएसआर नाम से लोकप्रिय, वर्ष 2004 से 2009 तक आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्थे। वे कड़प्पा से नौंवीं, दसवीं, ग्यारवीं और बारहवीं लोकसभा के लिए चार बार लोकसभा सदस्य चुने गए। पुलिवेंदुला से पांच बार विधानसभा सदस्य चुने गए। 2003 में उन्होंने पूरे आन्ध्र प्रदेश में पदयात्रा की. 2004 में उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता। 2 सितंबर 2009 को उन्हें ले जा रहा हेलीकॉप्टर नल्लामला के जंगल में खो गया। 3 सितंबर की सुबह करनूल से 40 नॉटिकल मील की दूरी पर रूद्रकोंडा की पहाड़ी पर उनका क्षत-विक्षत शव मिला। उनके साथ हेलीकॉप्टर से जा रहे चार अन्य लोगों की भी मौत हो गई। उनके लापता हेलीकॉप्टर की खोज के लिए भारत का सबसे बड़ा तलाशी अभियान चलाया गया।

विजय रूपाणी 5 अगस्त 2016 से 11 सितंबर 2021 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वे भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में राजकोट पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से गुजरात विधानसभा के सांसद थे। वे एयर इंडिया की उड़ान 171 के दुर्घटना में मारे गए यात्रियों में से एक थे। 12 जून 2025 को वे एयर इंडिया फ्लाइट 171 में सवार 241 लोगों में से एक थे जो लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए जा रही थी। अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान बीजे मेडिकल कॉलेज के एक छात्रावास ब्लॉक में दुर्घटनाग्रस्त हो गयी।

यह भी सत्य है कि एक नेता या अधिकारी की मृत्यु केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं होती। उसके साथ अनुभव, निर्णय क्षमता और भविष्य की संभावनाएँ भी समाप्त हो जाती हैं। राष्ट्र के लिए यह क्षति आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। आज आवश्यकता है कि हवाई सुरक्षा को औपचारिकता नहीं राष्ट्रीय दायित्व माना जाए। वीआईपी संस्कृति से ऊपर उठकर यह स्वीकार करना होगा कि सुरक्षा से बड़ा कोई पद, कोई समय सीमा और कोई दबाव नहीं होता। आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँचने की महत्वाकांक्षा तभी सार्थक है, जब सुरक्षित लौटने की जिम्मेदारी भी उतनी ही ऊँची हो।

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