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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एआई के सही उपयोग पर दिया जोर
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) लखनऊ एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “एआई मंथन–2026: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में एआई की चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषयक कार्यशाला का समापन बुधवार को हुआ। इस कार्यशाला में प्रदेश के 27 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। दो दिनों तक चले इस मंथन में उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की संभावनाओं, उपयोगिता और चुनौतियों पर गहन चर्चा की गई।
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एआई वर्तमान की आवश्यकता : राज्यपाल
समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का समय तीव्र परिवर्तन का है और ऐसे में एआई को अपनाना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि एआई का जितना सकारात्मक उपयोग है, उतना ही दुरुपयोग भी सामने आ रहा है। इसलिए बच्चों और युवाओं को एआई के सही और नैतिक उपयोग के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। राज्यपाल ने कहा कि एआई के माध्यम से शोध, अनुवाद, पुस्तक निर्माण और समस्याओं के समाधान को सरल बनाया जा सकता है। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे विभागीय समस्याओं पर आधारित प्रोजेक्ट तैयार करें और केंद्र व राज्य सरकार के बजट से अधिकतम फंड प्राप्त करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने शिक्षकों और शोध छात्रों को मिलकर कार्य करने तथा गरीब और संसाधनहीन बच्चों को एआई के माध्यम से शिक्षा से जोड़ने का आह्वान किया।
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तकनीकी सत्रों में एआई के विविध आयामों पर चर्चा
कार्यशाला के दूसरे दिन के पहले तकनीकी सत्र में एआई इन एग्जामिनेशन सिस्टम, क्वेश्चन पेपर सेटिंग एवं लैब प्रैक्टिकल विषय पर चर्चा हुई। आईबीएम इंडिया की सागरिका ने एआई आधारित आईबीएम बॉब के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह छात्रों को रियल वर्ल्ड डेटा उपलब्ध कराता है और सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
एडिशनल प्रतिकुलपति प्रो. एम.के. दत्ता ने जेनेरेटिव एआई, कंप्यूटर विज़न एवं बायोमेडिकल फील्ड में एआई की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सर्वाइकल एवं ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों की पहचान और उपचार में एआई अहम भूमिका निभा रहा है।
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भारतजेन और सोवरेन एआई पर जोर
आईआईटी कानपुर के प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने भारतजेन एवं सोवरेन जेनरेटिव एआई की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत को एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है। भारतीय भाषाओं, डेटा और संस्कृति पर आधारित एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं, जिससे देश का अपना एआई इकोसिस्टम तैयार हो सके।
इवैलुएट एआई पुणे के संस्थापक आकाश सक्सेना ने एजुकेशन टू एम्प्लॉयबिलिटी: ए डेटा ड्रिवन पर्सपेक्टिव विषय पर कहा कि एआई के माध्यम से छात्रों की क्षमताओं का आकलन कर उन्हें उपयुक्त रोजगार से जोड़ा जा सकता है। आईआईटी कानपुर के डॉ. नितिन सक्सेना ने रिचार्ज उत्तर प्रदेश विद एआई परियोजनाओं की जानकारी साझा की, जिनमें विभिन्न विभागों में एआई आधारित समाधान लागू किए जा रहे हैं।
एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह तथा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. अंशु सिंह ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों में एआई को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी साझा की। इस अवसर पर एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पाण्डेय के निर्देशन में एआई ओपीडी मैनेजमेंट सिस्टम स्टार्टअप का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया।
राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल. जानी ने कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से अमृत प्राप्त हुआ, उसी तरह एआई मंथन से प्रदेश के विश्वविद्यालयों में क्रांतिकारी परिवर्तन की नींव पड़ी है।
कार्यक्रम के अंत में चयनित स्टार्टअप्स को राज्यपाल द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम से यूट्यूब के माध्यम से प्रदेश भर के तीन हजार से अधिक शिक्षक एवं छात्र जुड़े। राज्यपाल एवं कुलाधिपति के मार्गदर्शन में प्रदेश के विश्वविद्यालय निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यह एआई मंथन भविष्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
NAGARIK SATTA
