लखनऊ। विधानसभा में बजट पर बोलते हुए मंत्री राकेश सचान ने एमएसएमई क्षेत्र को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा वर्ष 2026-27 के लिए उद्योग विभाग, लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन हेतु 3800 करोड़ रुपये से अधिक का बजट, पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है।
मंत्री सचान ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो 3 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। वर्ष 2017-18 में जहां लगभग 46,500 करोड़ रुपये का ऋण वितरण हुआ था, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर 2.57 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसी प्रकार निर्यात 88,967 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसमें एमएसएमई का प्रमुख योगदान है।
उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि बिना ब्याज और बिना गारंटी ऋण के माध्यम से हजारों युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और अन्य योजनाओं के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। सरकार ने इन योजनाओं के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित किया है।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना को प्रदेश की पहचान बताते हुए मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और विपणन सहयोग से लाखों कारीगरों को लाभ मिला है। ओडीओपी उत्पादों को जीआई टैग दिलाने, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि फ्लैटेड फैक्ट्री, प्लग एंड प्ले पार्क, तकनीकी उन्नयन योजना और औद्योगिक भूमि नीतियों के माध्यम से उद्यमियों को सस्ती भूमि, आधुनिक अवसंरचना और वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है। आगरा, लखनऊ और वाराणसी में यूनिटी मॉल निर्माणाधीन हैं, जो ओडीओपी और भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक विपणन केंद्र बनेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत कर उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
NAGARIK SATTA