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‘अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष’
अखिलेश पाण्डेय
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की उपलब्धियों, नेतृत्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उनके बढ़ते योगदान का उत्सव है। भारत में यह अवसर भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की तेजी से बढ़ती भागीदारी को भी रेखांकित करता है। आज महिलाएँ सेना, नौसेना और वायु सेना में न केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व, रणनीतिक निर्णय और परिचालन कमान जैसे महत्वपूर्ण दायित्व भी निभा रही हैं। पिछले दशक में भारतीय रक्षा बलों में महिलाओं की संख्या और भूमिका दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहाँ महिला अधिकारियों की संख्या लगभग 3,000 थी, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 11,000 से अधिक हो चुकी है। प्रशिक्षण के अधिक अवसर, संस्थागत सुधार और समान अवसर नीतियों ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है।
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ऐतिहासिक यात्रा, सीमित भूमिकाओं से नेतृत्व तक
भारत की रक्षा सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी का इतिहास धीरे-धीरे विकसित हुआ है। स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में उनकी भूमिका मुख्यतः चिकित्सा और नर्सिंग सेवाओं तक सीमित थी। 1958 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला डॉक्टरों को आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में पुरुषों के समान शर्तों पर नियमित कमीशन दिया गया। इसके बाद 1992 में भारतीय सशस्त्र बलों ने महिलाओं के लिए अधिकारी स्तर पर प्रवेश का मार्ग खोल दिया। भारतीय सेना ने महिला विशेष प्रवेश योजना शुरू की जिसके तहत महिलाओं को गैर लड़ाकू शाखाओं में शामिल होने का अवसर मिला। इसी अवधि में भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने भी महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से विभिन्न तकनीकी, फ्लाइंग और प्रशासनिक शाखाओं में प्रवेश देना शुरू किया। यह निर्णय भारत की रक्षा नीति में एक निर्णायक बदलाव साबित हुआ, जिसने आगे चलकर महिलाओं के लिए अनेक नए अवसरों की नींव रखी। पिछले कुछ वर्षों में सरकार और रक्षा मंत्रालय द्वारा कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए जिनसे महिलाओं को सशस्त्र बलों में दीर्घकालिक कैरियर और नेतृत्व के अवसर मिल रहे हैं। महिला अधिकारियों को अब कर्नल (चयनित श्रेणी) तक पदोन्नति के लिए विचार किया जा रहा है और उन्हें कमान संबंधी नियुक्तियाँ भी सौंपी जा रही हैं। इसके साथ ही कैरियर प्रगति में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए विशेष छूट और प्रशिक्षण अवसर भी प्रदान किए गए हैं।
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भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को अब कई शाखाओं में स्थायी कमीशन दिया जा रहा है। सेना चिकित्सा कोर, सेना दंत कोर और सैन्य नर्सिंग सेवा के अलावा 12 अन्य शाखाओं में भी महिलाओं के लिए दीर्घकालिक सेवा के अवसर उपलब्ध हैं। महिला अधिकारी अब उच्च पदों पर पदोन्नत हो रही हैं और विभिन्न सैन्य इकाइयों की कमान भी संभाल रही हैं, जो सेना में बढ़ती लैंगिक समावेशिता का प्रमाण है।
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भारतीय नौसेना में नई संभावनाएँ
भारतीय नौसेना ने महिलाओं के लिए समुद्री परिचालन के नए द्वार खोले हैं। महिला अधिकारियों को अब युद्धपोतों पर तैनात किया जा रहा है तथा उन्हें पायलट और नौसेना वायु संचालन अधिकारी के रूप में भी नियुक्त किया जा रहा है। नौसेना ने पनडुब्बियों को छोड़कर लगभग सभी शाखाओं को महिलाओं के लिए खोल दिया है। इसके अलावा अग्निपथ योजना के माध्यम से भी महिलाओं की भर्ती की जा रही है। विमानन क्षेत्र में महिला अधिकारी अब रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट स्क्वाड्रन में भी शामिल हो रही हैं। भारतीय नौसेना अकादमी में जनवरी 2024 से 10$2 बी.टेक प्रवेश योजना के माध्यम से महिला कैडेटों की भर्ती भी शुरू हो चुकी है।
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भारतीय वायु सेना में अग्रणी भूमिका
भारतीय वायु सेना महिलाओं को उड़ान और लड़ाकू भूमिकाओं में शामिल करने वाली अग्रणी सेवाओं में रही है। 2015 में महिलाओं को लड़ाकू पायलट के रूप में शामिल करने का प्रयोग शुरू हुआ, जिसे 2022 में स्थायी नीति का रूप दे दिया गया। आज महिला पायलट लड़ाकू विमानों को उड़ाने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा बन रही हैं। साथ ही एनसीसी स्पेशल एंट्री और एनडीए प्रवेश के माध्यम से भी महिलाओं को वायु सेना में शामिल होने के अवसर मिल रहे हैं।
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एनडीए में महिलाओं का प्रवेश
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में महिलाओं का प्रवेश भारतीय सैन्य इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जाता है। 2022 से महिलाओं को छक्। में प्रवेश दिया जा रहा है। मई 2025 में 17 महिला कैडेटों और नवंबर 2025 में 15 महिला कैडेटों ने एनडीए से स्नातक किया। 2026 की शुरुआत तक कुल 158 महिला कैडेट अकादमी में शामिल हो चुकी हैं। राज्यों के अनुसार देखें तो हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से सबसे अधिक महिला कैडेट एनडीए में पहुँची हैं। संयुक्त राष्ट्र लैंगिक समानता रणनीति के अनुरूप, जिसका लक्ष्य 2028 तक सैन्य टुकड़ियों में 15 प्रतिशत महिलाएं और स्टाफ अधिकारी या पर्यवेक्षक के रूप में 25 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करना है, भारत ने स्टाफ अधिकारी और पर्यवेक्षक श्रेणी में पहले ही 22 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया है, जो शांतिरक्षा अभियानों में वैश्विक लैंगिक समावेशन लक्ष्यों की दिशा में सार्थक प्रगति है।
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भारतीय सशस्त्र बलों में कई महिला अधिकारियों ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैंः-
- लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर सेना की चिकित्सा सेवा की महानिदेशक बनने वाली पहली महिला बनीं।
- कर्नल पोनुंग डोमिंग 15,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित सीमा टास्क फोर्स की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
- स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ युद्ध अभियानों के लिए अर्हता प्राप्त करने वाली पहली महिला लड़ाकू पायलट हैं।
- स्क्वाड्रन लीडर अवनी चतुर्वेदी भारतीय वायु सेना की पहली महिला लड़ाकू पायलट बनीं।
- स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह भारत की पहली महिला राफेल पायलट बनीं।
- विंग कमांडर अंजली सिंह विदेशी मिशन पर तैनात होने वाली पहली महिला सैन्य राजनयिक बनीं।
- इन उपलब्धियों ने सशस्त्र बलों में महिलाओं की क्षमताओं और नेतृत्व को नई पहचान दी है।
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वैश्विक शांति अभियानों में योगदान
भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी सक्रिय है। 2025 तक छह संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में 150 से अधिक भारतीय महिलाएँ कार्यरत हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के लैंगिक समानता लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए स्टाफ अधिकारी और पर्यवेक्षक श्रेणी में लगभग 22 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व हासिल किया है। भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल संख्या में वृद्धि नहीं है बल्कि यह संस्थागत सोच में आए व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। एनडीए में बढ़ती सीटें, विभिन्न रैंकों में महिलाओं की भर्ती और समान अवसर नीतियाँ आने वाले वर्षों में महिलाओं को सेना, नौसेना और वायु सेना के हर क्षेत्र में और अधिक जिम्मेदारियाँ निभाने का अवसर देंगी। महिलाओं की यह बढ़ती उपस्थिति न केवल लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारत की सैन्य शक्ति को भी और अधिक सशक्त बनाती है। आज की महिला सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए यह संदेश दे रही हैं कि राष्ट्र सेवा में क्षमता और साहस का कोई लैंगिक विभाजन नहीं होता।
NAGARIK SATTA

