Breaking News

कंडोम सिर्फ़ जनसंख्या नियंत्रण का ही नही, हथियारों का सुरक्षा कवच भी है

  • कंडोम उत्पादन पर भी भारी पड़ रहा है युद्ध
  • कंडोम के कच्चे माल की आपूर्ति बाधित
  • युद्ध से बढ़ सकते हैं कंडोम के दाम
  • भारत में है कंडोम का विशाल उद्योग
लेखक: डॉ जयशंकर प्रसाद शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार

लखनऊ। भारत में कंडोम का विशाल उद्योग है। यह प्रति वर्ष 40 करोड़ से अधिक कंडोम का उत्पादन करता है। लेकिन अब कंपनियां कच्चे माल की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत का सामना कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में कंडोम उत्पादन व उत्पाद की कीमतों में वृद्धि होने की अत्यधिक उम्मीद है।

किसी भी देश में युद्ध छिड़ जाने पर कंडोम की डिमांड बढ़ जाती है। क्या आप जानते हैं?  आखिर ऐसा क्यों होता है?देश-विदेश में कंडोम उत्पाद अर्थात (निरोध) हालांकि निरोध भी एक कंपनी का ही नाम है। इसका उत्पादन विभिन्न प्रकार की कंपनियों द्वारा अलग-अलग नामों से किया जाता है। आमतौर पर लोग यही जानते हैं कि इस कंडोम उत्पाद का प्रयोग मानव समाज में महिला एवं पुरुष शारीरिक संबंध बनाते समय अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा व यह अनचाहे गर्भ को रोकने और HIV सहित यौन संचारित संक्रमणों व हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा प्रदान करने का एक प्रभावी तरीका है। इसे सावधानी के लिए उपयोग करते हैं,या फिर सिर्फ़ जनसंख्या नियंत्रण को रोकने के लिए करते हैं। जबकि केवल ऐसा ही नही है। जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए ही नही किया जाता है। बल्कि इसका प्रयोग युद्ध में काम आने वाले हथियारों की सुरक्षा के लिए भी किया जाता है। युद्ध में हथियारों को सुरक्षित रखने के लिए भी कंडोम बहुत कारगर होता है। इसीलिए प्राकृतिक मार से बचने के लिए सिर्फ़ कंडोम के उत्पादों का प्रयोग किया जाता है।

बता दें कि एक मुलायम, लुब्रिकेटेड थैली है। यह मुख्य रूप से नाईट्राइल (सिंथेटिक रबर) या लेटेक्स से बना होता है, जिसके दोनों सिरों पर लचीली रिंग होती हैं। कंडोम में लगे लुब्रिकेंट रासायनिकी से हथियारों को मौसम के विपरीत होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

इसलिए हथियारों को सुरक्षित रखने में कारगर साबित होता है।

भारत में कंडोम का विशाल उद्योग है, जिसकी कीमत लगभग 86 करोड़ डॉलर (लगभग 8,000 करोड़ रुपये से अधिक) है और यह प्रति वर्ष 40 करोड़ से अधिक कंडोम का उत्पादन करता है। लेकिन अब कंपनियां कच्चे माल की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत का सामना कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में कीमतों में वृद्धि की खबरें हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सप्लाई चेन प्रभावित होने से कंडोम की कीमतें बढ़ने की आशंका है। सैन्य उपयोग में ये हथियारों को धूल-पानी से बचाने, जरूरी सामान को सूखा रखने, विस्फोटक उपकरण सुरक्षित करने और आपातकालीन चिकित्सा में इस्तेमाल होते हैं, इसलिए युद्ध के समय इनकी मांग बढ़ जाती है। इसका उत्पादन करने में कच्चा माल बाहर से न आ पाने पर भारत में कंडोम उत्पादन करने वाली कंपनियों को भारी पड़ रहा है।

अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान पर चल रहे युद्ध का असर भारत में भी असर पड़ा है।

लेटेक्स के उत्पादन के लिए आवश्यक अमोनिया का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों से आता है।

युद्ध के कारण कंडोम के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से कंडोम की कीमतें बढ़ने की आशंका है।

कंडोम निर्माता कंपनियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास व्यापार मार्गों में व्यवधान के कारण प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हुई है, जो एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग है।

चिकनाई के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन तेल जैसे प्रमुख पदार्थ मिलना मुश्किल हो गया है, जबकि कंडोम को फटने से बचाने वाले निर्जल अमोनिया की कीमत में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी में आई बाधाओं से आपूर्ति प्रभावित हुई है।

कच्चे माल की कमी और एल्युमिनियम फॉयल और पीवीसी सहित पैकेजिंग सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन धीमा हो रहा है।

About Nagarik Satta

Check Also

समावेशी विकास का बड़ा उदाहरण, भारतीय डिजिटल मॉडलः जयशंकर

न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों (सीएचओजीएम 2026) के कार्यकारी सत्र में …

एमपी इंटर कॉलेज से भाजपा ने निकाली लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा

राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में उमड़ा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *