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लखनऊ के युवाओं का अभियान: डेयरी उद्योग के जलवायु प्रभाव और बीफ निर्यात के संबंध पर जागरूकता

लखनऊ। बढ़ती गर्मी और जल संकट के बीच शहर के युवा देश के डेयरी उद्योग की पर्यावरणीय और नैतिक लागतों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाली यही व्यवस्था भारत के प्रमुख भैंस मांस (बीफ) निर्यात से भी जुड़ी है। इसी संदेश को सामने रखने के लिए युवाओं ने हुसैनाबाद क्लॉक टावर पर एक सार्वजनिक इंस्टॉलेशन के माध्यम से डेयरी उद्योग के पर्यावरणीय प्रभावों और उससे जुड़े अनदेखे संबंधों पर ध्यान आकर्षित किया। देश के 20 शहरों में चल रहे इस अभियान में युवा कार्यकर्ता लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे डेयरी सप्लाई चेन में पशुओं की पूरी यात्रा पर विचार करें। उनका संदेश है “दूध और बीफ की शुरुआत एक ही पशु से होती है।”

सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर चर्चा तब तेज हुई जब टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति के एक क्लिप वाली इंस्टाग्राम रील वायरल हुई। इसमें होस्ट अमिताभ बच्चन प्रतिभागी की बात सुनकर आश्चर्य व्यक्त करते दिखाई दिए। यह रील व्यापक रूप से साझा की गई और इसने डेयरी उद्योग में पशुओं की स्थिति पर बहस को आगे बढ़ाया। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बन चुका है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि डेयरी उत्पादन का पर्यावरणीय असर भी गंभीर है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार एक लीटर दूध उत्पादन में बड़ी मात्रा में लगभग 1078 लीटर पानी की खपत होती है, जो भूजल संकट झेल रहे राज्यों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। राज्य के कई जिलों में जल स्तर गिरने की समस्या पहले से ही चिंताजनक है।

साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उद्योगों के वर्गीकरण में डेयरी और बूचड़खानों को उच्च प्रदूषण श्रेणी में रखा गया है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि डेयरी और मांस उद्योग एक ही आपूर्ति तंत्र के हिस्से हैं, क्योंकि दूध देना बंद करने वाले पशुओं को अक्सर मांस आपूर्ति शृंखला में भेज दिया जाता है। जलवायु प्रभाव की बात करें तो पशुधन से निकलने वाली मीथेन गैस भी एक बड़ी चिंता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश पशुधन मीथेन उत्सर्जन के मामले में अग्रणी राज्यों में है। यह उत्सर्जन पशुओं के पाचन और अपशिष्ट से होता है, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है।

अभियान से जुड़े कार्यकर्ता राघवेन्द्र सिंह का कहना है, “दूध और मांस उद्योग अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही व्यवस्था के हिस्से हैं। लोगों को इस संबंध को समझने की आवश्यकता है।”

एनिमल लिबरेशन लखनऊ एक युवा नेतृत्व वाला समूह है, जो पशु-आधारित कृषि के पर्यावरणीय और नैतिक प्रभावों पर जागरूकता फैलाने के लिए शांतिपूर्ण सार्वजनिक अभियान आयोजित करता है।

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