- मुख्यमंत्री ने किया जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर संगोष्ठी का शुभारंभ
- सीएम योगी ने जुलाई में एक दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का रखा लक्ष्य
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदर्शनी का अवलोकन किया, बच्चों को चॉकलेट दीं और आमजन को कपड़े के झोले देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। सीएम ने बच्चों के साथ सेल्फी ली और वृक्ष कलश में जल भी अर्पित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से प्रकृति व जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया व स्मगलरों के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सजग नागरिकों का दायित्व है कि मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करें। सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेशवासियों को पांच संकल्प भी दिलाए। इसमें एक पेड़ मां के नाम लगाना, शरारती तत्वों व जीव-जंतुओं से पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करना और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनाना शामिल है। सीएम ने कटाक्ष किया कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है, ऐसे लोगों को टोकें। जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं, कोशिश हो कि पानी व्यर्थ न हो।
- जल है तो कल है, वन है तो जीवन है
अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि जल है तो कल है, वन है तो जीवन है यानी जीवन चक्र एक-दूसरे के साथ जुड़ा है। फिर भी हमने इसकी सर्वाधिक उपेक्षा की। 40 से ऊपर हर व्यक्ति महसूस करता है कि पर्यावरण के साथ हुए खिलवाड़ की कीमत को दुनिया किस रूप में चुका रही है। 25 वर्ष पहले और वर्तमान मौसम चक्र में एक से डेढ़ महीने का अंतर आ गया। भारत व उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। मौसम चक्र में अंतर से सर्वाधिक प्रभावित किसान होगा। उसकी आमदनी प्रभावित होगी, अतिवृष्टि-अनावृष्टि का सामना करना पड़ेगा। खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है। असमय घटित होने वाली आपदाएं चेतावनी भी हैं।
- कुकरैल और लखनऊ के तापमान में मिलेगा अंतर
सीएम ने कुकरैल वन क्षेत्र के शानदार प्राकृतिक वातावरण का जिक्र करते हुए कहा कि वहां और लखनऊ के तापमान में अंतर होता है। लखनऊ में 45 तो कुकरैल में तापमान 40 या उससे कम होगा। प्रकृति की गोद में जो भी आगे बढ़ेगा, वह आरोग्यता के लिए महत्वपूर्ण होगा। हमने कुकरैल से अवैध कब्जे हटाए। आज कुकरैल के किनारे लखनऊ का सबसे शानदार प्राकृतिक दृश्य ‘सौमित्र वन’ भी दिख रहा है।
- प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता सुरक्षित रहेगी
सीएम ने विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम ‘इंस्पायर्ड बाई नेचर फॉर क्लाईमेट फॉर अवर फ्यूचर’ का जिक्र किया और कहा कि स्वच्छ वायु, निर्मल जल, उपजाऊ भूमि व हरित वन मानव सभ्यता की जीवन रेखा हैं। जब प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानवता सुरक्षित रह पाएगी। जल जीवन मिशन के तहत हर घर में जल व सबमर्सिबल की व्यवस्था हो गई है, लेकिन पहले कुआं खोदना पवित्र कार्य माना जाता था। दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ी के बराबर एक तालाब, दस तालाब के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है यानी वृक्ष का महत्व सर्वाधिक है।
- पीएम ने दिया एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य का संदेश
सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने तीन वर्ष पहले ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का आह्वान किया था। उन्हीं की प्रेरणा से 9 वर्ष में प्रदेश में पौधरोपण के वृहद कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। संकटों का सामना करने के लिए पीएम ने वसुधैव कुटुम्बकम के अनुरूप ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का संदेश भी दुनिया को दिया है। उनके आहवान पर हम सब भारतवासी पौधरोपण महाभियान के तहत जननी व जन्मभूमि के प्रति पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के साथ खड़े हैं।
- जुलाई में एक दिन में लगाएंगे 35 करोड़ पौधे
सीएम ने कहा कि मार्च 2017 में पौधरोपण के लिए वन विभाग की नर्सरी में बमुश्किल 5 लाख पौधे मिल पाए थे, लेकिन आज सरकारी व निजी नर्सरी में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। आज प्रदेश भर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पांच करोड़ पौधे लग रहे हैं। अब जुलाई में महाभियान चलाएंगे और एक दिन में नागरिकों के साथ मिलकर 35 करोड़ पौधे लगाएंगे।
- रामगढ़ताल व चिलुआताल को किया संरक्षित
सीएम ने तालों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि हमने गोरखपुर में 1400 एकड़ में फैले रामगढ़ताल व 400-500 एकड़ में फैले चिलुआताल को संरक्षित किया है। ये नेचुरल वाटर बॉडी हैं। सीएम ने उन ग्राम प्रधानों की भी सराहना की, जिन्होंने ग्राम पंचायत में वेटलैंड या रामसर साइट्स के रूप में इसे आगे बढ़ाने में योगदान दिया है या उनके चिह्नीकरण व नोटिफिकेशन से जुड़े हैं। सीएम ने श्रावस्ती की ऐतिहासिक व पौराणिकता पर बल दिया और बताया कि पहले इसकी उपेक्षा होती थी, लेकिन आज वहां केन नाला को बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट के रूप में अधिसूचित किया गया है।
NAGARIK SATTA

