गोरखपुर। प्रदेश के स्कूली बच्चों को पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकहा रेलवे स्टेशन के समीप अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा प्रदेश सरकार के सहयोग से निर्मित अत्याधुनिक केंद्रीयकृत रसोईघर का उद्घाटन किया। यह रसोईघर प्रतिदिन एक लाख परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए पौष्टिक एवं संतुलित भोजन तैयार करने की क्षमता रखता है।
मुख्यमंत्री ने रसोईघर का निरीक्षण कर वहां अपनाए गए स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों की सराहना की। उन्होंने स्वयं विद्यार्थियों को भोजन वितरित किया तथा परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा संचालित मिड-डे मील योजना देशभर में अपनी गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए जानी जाती है। लखनऊ, वाराणसी, मथुरा, आगरा और कानपुर जैसे शहरों में सफल संचालन के बाद अब गोरखपुर भी इस आधुनिक व्यवस्था से जुड़ गया है। नए शैक्षणिक सत्र में प्रारंभिक चरण में 50 हजार और बाद में प्रतिदिन एक लाख बच्चों को इस रसोईघर से ताजा एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मिड-डे मील योजना की लागत के अतिरिक्त आवश्यक वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराती है, जबकि अक्षय पात्र फाउंडेशन अत्यंत व्यवस्थित ढंग से भोजन निर्माण और वितरण की जिम्मेदारी निभाता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज का आधार स्वच्छ और पौष्टिक भोजन है तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपने खान-पान के प्रति सजग रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता और स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। यदि भोजन स्वच्छ होगा तो शरीर स्वस्थ रहेगा और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि होटल, रेस्तरां और बड़े आयोजनों में अक्सर लापरवाही के कारण फूड पॉइजनिंग की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन इस केंद्रीयकृत रसोईघर में खाद्य सुरक्षा के प्रत्येक मानक का विशेष ध्यान रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर के एक लाख बच्चे अब पौष्टिक मिड-डे मील का लाभ प्राप्त कर कुपोषण से मुक्ति और सुपोषण की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “हर बच्चा स्वस्थ” के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ और शिक्षित बच्चे ही विकसित भारत के निर्माण में अपनी प्रतिभा से योगदान देंगे।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने शिक्षा को समाज की सबसे मजबूत आधारशिला बताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों का व्यापक कायाकल्प किया है। विद्यालयों में आधुनिक सुविधाएं, बेहतर अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने शिक्षकों और अधिकारियों से अपील की कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे तथा सभी विद्यार्थियों को समय पर यूनिफॉर्म, पुस्तकें, बैग, जूते-मोजे और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऑपरेशन कायाकल्प को नीति आयोग ने भी सफलता की मिसाल के रूप में स्वीकार किया है। माध्यमिक शिक्षा में नकलविहीन परीक्षाओं, प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से विद्यालयों के जीर्णोद्धार तथा आधुनिक शिक्षण सुविधाओं ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है।
उन्होंने मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रदेश के प्रत्येक जनपद में निःशुल्क कोचिंग की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। परीक्षा प्रणाली में भी व्यापक सुधार किए गए हैं, जिससे अब एक माह के भीतर परीक्षा से लेकर परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाती है और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए अधिक समय मिलता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के सभी परिषदीय और माध्यमिक विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर देश के लिए एक आदर्श शिक्षा मॉडल बनेंगे।
कार्यक्रम को अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एवं सह-संस्थापक चंचलापति दास ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान, उपाध्यक्ष चारू चौधरी, गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक बिपिन सिंह, फतेह बहादुर सिंह, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, सरवन निषाद, राजेश त्रिपाठी सहित अक्षय पात्र फाउंडेशन के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
NAGARIK SATTA
