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आई.एस.आई.ने आपरेशन ट्रिपल-टी के तहत लाल किला में हिंसा का प्लान किया था – राजेंदर दूबे (स्पेशल एडिटर)

भारतीय खुफिया और जांच एजेंसियों (विशेषकर दिल्ली पुलिस) ने उस मकड़जाल को तार-तार कर दिया है जिसे, हिंदुस्तान को दुनिया में बदनाम करने के लिए ही विशेषकर बुना गया था. इसके लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बैसाखी बनाया था, 26 जनवरी 2021 को दिल्ली में होने वाली किसान ट्रैक्टर रैली को. ट्रैक्टर रैली की आड़ में अपनों से ही अपनों को (हिंदुस्तान को अपनों से ही) बदनाम करा डाला जाए. आईएसआई कहीं पकड़ में न आये. इसके लिए, उसने (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) ‘Triple-T’ का पहले तो मकड़जाल खुद बुना. उसके बाद उसमें उतार दिये दुनिया के कुछ हिस्सों में खालिस्तान की चाहत में बौराए घूम रहे चंद उतावलों को.
ऐसा नहीं है कि यह जानकारी अब भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ लगी है. इस चक्रव्यूह में हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों ने बीते साल यानी जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ, उसके कुछ दिन बाद ही (नवंबर 2020 के मध्य में) घुसना शुरू कर दिया था. यह जानकारी वक्त गंवाए बिना खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली पुलिस की इंटेलीजेंस विंग व अन्य जांच एजेंसियों (NIA) को भी दे दी थी. क्योंकि आने वाले वक्त में इस चक्रव्यूह के भीतर घुसकर उसे नेस्तनाबूद तो जांच एजेंसियों को ही करना था. जैसा कि इन दिनों देश की राजधानी में चल रहा है.
दिल्ली पुलिस लाल किला कांड हिंसा में एक के बाद एक गिरफ्तारियां कर रही है. वे लोग कानून के शिकंजे में फंस रहे हैं जिनके बारे में दुनिया में कभी कोई सोच भी नहीं सकता था कि, बाहर से भोले-भाले और उच्च शिक्षित चेहरे भी इस कदर घिनौने षडयंत्र का हिस्सा हो सकते हैं! जो अपने ही देश यानी हिंदुस्तान की आबरु को तार-तार करने में नहीं शरमाएंगे. हालांकि, इन तमाम चेहरों की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों से इनके कथित समर्थकों की नींद उड़ी हुई है. गिरफ्तार आरोपियों के हलकान समर्थक चीख-चीख कर गिरफ्तारियों को गलत बताने का हल्ला मचा रहे हैं. जबकि जांच एजेंसियों मुतमईन हैं कि, उनके पास गिरफ्तार लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं.

हिंदुस्तान ने भेदा ISI का चक्रव्यूह
अब आइए आगे बढ़ते हैं. दरअसल सिंघु बॉर्डर साइड पर इकट्ठे किसानों की भीड़ में जिस तरह के संदिग्ध लोगों की भीड़ अचानक घुस आने की भनक, हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों को नवंबर 2020 के अंत में लगी, तो कान खड़े हो गए. प्लानिंग के मुताबिक, किसान आंदोलन की आड़ में 26 जनवरी वाले दिन ट्रैक्टर रैली निकाले जाने की कोई मंशा असली किसानों की तो थी ही नहीं. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के उकसावे में फंसे और खालिस्तान की कथित चाहत में उकता रहे चंद “मोहरे” (दीप सिद्धु, इकबाल सिंह रागी, शांतनु, दिशा,रवि, निकिता जैकब, फेडरिक) घिरते चले गए.
हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने दबी जुबान बताया, “यह सब नाम हमारी नजर में बहुत पहले से थे. चूंकि हम 26 जनवरी ट्रैक्टर रैली हिंसा पर नजर रखे हुए थे. हम चाहते थे कि, संदिग्ध खुलकर और उस हद तक सामने आ सकें कि, वे कानूनी रुप से दण्ड के भागी बनाए जा सकें, तभी जांच एजेंसियां उन पर हाथ डालें. इसीलिए 26 जनवरी की हिंसक ट्रैक्टर रैली में भी सरकारी अमला (दिल्ली पुलिस) बेहद सब्र से काम ले रही थी.”

तब की चुप्पी ने अब मचाया कोहराम
इसी खुफिया अधिकारी के मुताबिक, “जबकि किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान या फिर लाल किला के अंदर जो कुछ उस दिन हुआ, किया या फिर करवाया जा रहा था वो सब हथियारबंद दिल्ली पुलिस को उकसा कर हथियारों के मुंह खोल देने के लिए ही किया जा रहा था. वो बुरी घड़ियां जैसे भी कहिए निकल गईं. हालांकि उस बुरी घड़ी को टालने में दिल्ली पुलिस के 500 से ज्यादा बहादुर हथियारबंद जवान जख्मी हो गये. जो कि एक बहुत बड़ा नुकसान है. हां, उस दिन अगर दिल्ली पुलिस ने हथियारों की नालों से गोलियां निकाल दी होतीं तो, पाक खुफिया एजेंसी के चक्रव्यूह में हिंदुस्तान का फंसना तय था.”
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, “उस दिन हमारी चुप्पी के एवज में ट्रैक्टर रैली के बीच जो उपद्रव मचा, या मचवाया गया था, हम यह नहीं कह रहे कि वो सब ठीक था. मगर हमारे चुप रहने से आज को दिल्ली पुलिस या हिंदुस्तानी हुकूमत पर उंगली नहीं उठा सकता कि, उसने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा दी. संदिग्ध तो हमारी नजर में पहले थे. हम यह भी सबूत लेकर हाथ में बैठे थे कि, सब कुछ करा धरा पाकिस्तान का है. सड़क पर उपद्रव मचाने वाले से हकीकत से अंजान मोहरे हैं.”

खुद फंसी अपने Triple-T मकड़जाल में ISI
भारतीय खुफिया एजेंसी के एक जिम्मेदार अफसर की बात मानी जाये तो, “पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई खुद को सामने लाये बिना देश (हिंदुस्तान) को उस दिन (26 जनवरी 2021 की ट्रैक्टर रैली) दुनिया की नजरों में बदनाम करा डालने का पुख्ता प्लान तैयार कर चुकी थी. ताकि बबाल की जिम्मेदारी का ठीकरा उसके सिर (आईएसआई) न फूटकर हिंदुस्तान के ही सिर ठीकरा फूटे. इसके लिए आईएसआई ने ‘Triple -T जैसे घातक फार्मूले को ईजाद किया.’ अब समझिए दिल्ली से हजारों मील दूर पाकिस्तान में मौजदू उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का ‘ट्रिपल-टी’ का पूरा ताना-बाना क्या और कैसा था?
ट्रिपल टी यानी टेलीग्राम (Telegram), ट्विटर (Twitter) और टूलकिट (Toolkit) वाया खालिस्तान समर्थक. दरअसल हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों ने जो यह ट्रिपल-टी का गठजोड़ का जो कनेक्शन दिल्ली पुलिस इंटेलीजेंस विंग के हवाले किया था, वही आज हो रही ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों की वजह है. अगर यह ट्रिपल-टी फार्मूला, हिंदुस्तानी एजेंसियों ने ट्रैक्टर रैली से पहले ही न पकड़ लिया होता, तो दिल्ली और देश के हालात बीती 26 जनवरी यानी किसान ट्रैक्टर रैली वाले दिन कुछ और व बेहद बदतर हो चुके होते.

दिशा, रवि, जैकब को हल्के में मत लीजिए!
जांच में जुटी दिल्ली पुलिस की टीमों के एक जिम्मेदार आला अफसर के मुताबिक, “हालांकि अभी बहुत ज्यादा खुलकर या ठोस कह पाना मुश्किल है. फिर भी यह तो सामने आता ही जा रहा है कि, विदेशी ताकतों के हाथ में खेलने वाले लोग इस ट्रिपल टी के मकड़जाल में बुरी तरह उलझ चुके थे. वे पीछे की कहानी और षडयंत्र के अंदर मौजूद घिनौनी मंशा को समझ ही नहीं पाए. सिर्फ चंद लोगों के हाथों कठपुतली और मोहरा बनकर आगे बढ़ते रहे.”क्या वाकई ट्रिपल टी के मकड़जाल के प्रमुख तीन लोग ही यानी दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु ही हैं?
सवाल में खुफिया और जांच एजेंसियों के अधिकारी भले खुलकर न बोलें, मगर दबी जुबान मानते हैं कि, दिशा रवि ने टूलकिट के लिए WhatsApp Group तैयार किया था. जबकि निकिता जैकब की भूमिका शांतनु की बनाई हुई उस टूलकिट को अपनी जरुरत के हिसाब से एडिट करने में संदिग्ध मिल रही है. जबकि दिशा रवि और निकिता जैकब के साथ जुड़ा शांतनु अपनी बनाई इस टूलकिट को अन्य लोगों तक पहुंचाने के मामले में संदिग्ध है.
क्या निकिता जैकब, दिशा रवि और शांतनु को पता था कि, यह सब पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर उनसे कराया जा रहा है? इस सवाल के जबाब पर दिल्ली पुलिस का जांच से जुड़ा कोई भी अफसर खुलकर बोलने को फिलहाल राजी नहीं है. सिवाय इसके कि, “जांच में कई चीजें निकल सामने आ रही हैं. जब तक हर चीज एक दूसरे से कनेक्ट न कर ली जाये, तब तक कुछ ठोस बोलना मुनासिब नहीं है.”

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