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साहस, जीवटता और नेतृत्व पर हुआ विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव

पूर्व कैंसर रोगियों ने साझा किए अपने संस्मरण, प्रतिकूल परिस्थितियों में उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने का दिया संदेश

लखनऊ। माइंडशेयर एवं लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज के फेयरफील्ड हॉल में “साहस, जीवटता (रेज़िलिएंस) और नेतृत्व” विषय पर एक विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, सार्वजनिक नीति और अकादमिक जगत से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ताओं ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के उर्दू विभाग की सहायक आचार्या डॉ. शबाहत फ़ातिमा ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया। अतिथियों का अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया गया। इसके बाद महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ईशा वी. लाल ने प्रार्थना के पश्चात अतिथियों को दीप प्रज्वलन के लिए मंच पर आमंत्रित किया।

कॉन्क्लेव का विषय डॉ. अखिलेश गुप्ता के संस्मरण “अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड” से प्रेरित था। इस संस्मरण में डॉ. गुप्ता ने एडवांस ओरल कैंसर के साथ अपने संघर्ष तथा गंभीर चिकित्सा चुनौतियों के बावजूद जनसेवा, विज्ञान और नेतृत्व के क्षेत्र में लौटने की अपनी यात्रा को साझा किया है।

डॉ. अखिलेश गुप्ता ने साझा की ‘अनब्रोकन’ रहने की यात्रा

कॉन्क्लेव के मुख्य वक्ता सिक्किम हिमनद खतरा आयोग के अध्यक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पूर्व सचिव तथा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) के पूर्व सचिव डॉ. अखिलेश गुप्ता रहे। वे विभिन्न प्रमुख आईआईटी से शैक्षणिक एवं सलाहकार भूमिकाओं में भी जुड़े रहे हैं।

अपनी पुस्तक “अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड” के संदर्भ में डॉ. गुप्ता ने अपने जीवन के अत्यंत कठिन दौर को साझा किया। उन्होंने बताया कि मार्च 2015 में एक मुख्य भाषण देने के कुछ समय बाद उन्हें एडवांस ओरल कैंसर का पता चला। इसके बाद उन्हें बड़ी सर्जरी, बार-बार असफल पुनर्निर्माण प्रक्रियाओं और जटिल चिकित्सा उपचारों से गुजरना पड़ा।

उन्होंने कहा कि कैंसर से संघर्ष केवल शारीरिक पीड़ा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति की मानसिक शक्ति, धैर्य और भविष्य के प्रति विश्वास की भी परीक्षा लेता है। गंभीर चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय जिम्मेदारी के पदों पर उनकी वापसी और विज्ञान, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सार्वजनिक नीति में निरंतर योगदान उनकी जीवटता का उदाहरण बना।

डॉ. गुप्ता की बातों में “नेवर से डाई” का संदेश प्रमुखता से उभरा। उन्होंने दृढ़ संकल्प, आशा और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने की इच्छाशक्ति को महत्वपूर्ण बताया। उनकी जीवन-यात्रा ने कैंसर से जूझ रहे लोगों, उपचार के बाद जीवन में लौट रहे लोगों, देखभाल करने वालों, विद्यार्थियों और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरणा देने वाला संदेश दिया।

डॉ. संजय दिवाकर ने रेखांकित की सार्वजनिक नीति और नेतृत्व की भूमिका

डॉ. संजय दिवाकर, उप निदेशक, नीति एवं योजना, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश; संयुक्त कुलसचिव, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के लिए उत्तर प्रदेश के राज्य नोडल अधिकारी ने कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में जनजागरूकता और संस्थागत पहलों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कैंसर जागरूकता से संबंधित सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए नागरिकों के बीच विश्वसनीय स्वास्थ्य जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और समुदाय मिलकर कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार के संबंध में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

डॉ. दिवाकर ने अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए और नेतृत्व के पदों तक पहुंचने की यात्रा में सामने आई चुनौतियों का उल्लेख किया। उनके विचारों ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि नेतृत्व केवल पद या अधिकार का नाम नहीं है, बल्कि निरंतर प्रयास, संघर्ष और प्रतिकूल परिस्थितियों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की क्षमता से भी विकसित होता है।

प्रो. हरि राम ने कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का किया आह्वान

कॉन्क्लेव में चिकित्सा क्षेत्र का महत्वपूर्ण दृष्टिकोण किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर प्रो. हरि राम ने प्रस्तुत किया।

ओरल कैंसर, ट्रॉमा, ट्यूमर और टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट सर्जरी के विशेषज्ञ प्रो. हरि राम ने विभिन्न प्रकार के कैंसर और उससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कैंसर के चेतावनी संकेतों को पहचानने, समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने तथा आमजन के बीच बीमारी को लेकर वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कैंसर से जुड़े भय, भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को कम करने के लिए जागरूकता आवश्यक है। समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप, विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा तक पहुंच, रोगियों और उनके परिवारों को भावनात्मक सहयोग तथा सही जानकारी कैंसर के खिलाफ व्यापक प्रयास के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

साहस, जीवटता और नेतृत्व को बताया परस्पर जुड़ी शक्तियां

कॉन्क्लेव की संकल्पना तीन परस्पर जुड़े मूल्यों—साहस, जीवटता और नेतृत्व—के इर्द-गिर्द की गई थी। चर्चा में यह विचार सामने आया कि साहस व्यक्ति को कठिन वास्तविकताओं का सामना करने की शक्ति देता है, जीवटता असफलताओं और चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करती है, जबकि नेतृत्व व्यक्तिगत अनुभवों को दूसरों के लिए प्रेरणा, दिशा और सहयोग में बदलने का माध्यम बन सकता है।

माइंडशेयर के महासचिव एवं आईआईटी दिल्ली से स्ट्रैटेजी एवं पब्लिक पॉलिसी में पीएचडी सैयद जुल्फी ने भी कॉन्क्लेव के बौद्धिक संदर्भ को विस्तार दिया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूके के पूर्व फेलो एवं विजिटिंग स्कॉलर तथा हिरोशिमा विश्वविद्यालय, जापान के पूर्व विजिटिंग स्कॉलर जुल्फी ने ऐसे मंचों के महत्व पर प्रकाश डाला, जहां व्यक्तिगत अनुभव, चिकित्सा, सार्वजनिक नीति, शिक्षा और नेतृत्व जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हो सके।

प्रतिकूलताओं से आगे जीवन की संभावनाओं पर हुआ संवाद

कॉन्क्लेव में चिकित्सा, उच्च शिक्षा, विज्ञान, सार्वजनिक नीति और व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों को एक साथ जोड़कर प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। जहां प्रो. हरि राम ने कैंसर के चिकित्सा एवं जागरूकता संबंधी पहलुओं को सामने रखा, वहीं डॉ. संजय दिवाकर ने सार्वजनिक नीति और व्यक्तिगत संघर्ष का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. अखिलेश गुप्ता की जीवन-यात्रा ने इन सभी आयामों को एक मानवीय संदर्भ से जोड़ा।

कार्यक्रम में यह विचार प्रमुखता से उभरा कि गंभीर संकट जीवन की दिशा को बदल सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति की संभावनाओं को निर्धारित कर दे। डॉ. गुप्ता की गंभीर बीमारी के बाद राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारियों में वापसी ने इस संदेश को व्यक्तिगत अनुभव के माध्यम से सामने रखा।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि गंभीर बीमारी या अन्य विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहे व्यक्ति के लिए परिवार, देखभाल करने वालों, चिकित्सकों, सहकर्मियों और संस्थानों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है।

कॉन्क्लेव ने विशेष रूप से युवाओं को जीवटता को कठिनाइयों की अनुपस्थिति के रूप में नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बावजूद उद्देश्य और आशा के साथ आगे बढ़ने की क्षमता के रूप में देखने का संदेश दिया।

माइंडशेयर और लखनऊ क्रिश्चियन डिग्री कॉलेज के संयुक्त आयोजन का समापन कैंसर जागरूकता, शीघ्र पहचान, भावनात्मक मजबूती और जिम्मेदार नेतृत्व पर नए सिरे से जोर देने के साथ हुआ।

अंत में महाविद्यालय के इतिहास विभाग की सहायक आचार्या डॉ. अल्पना बाजपेई ने मुख्य अतिथि, अतिथियों, सभी संकायों के आचार्यों तथा छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही कॉन्क्लेव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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