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डॉ रूचिता सुजय द्वारा स्वयं प्रभा चैनल, मीडिया साक्षरता कोर्स की 20 घंटे की रिकॉर्डिंग पूर्ण

  • डॉ रुचिता सुजय चौधरी द्वारा विकसित यह कोर्स शिक्षार्थियों को मीडिया के प्रति सजग बनाएगाः प्रो अजय तनेजा

लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की सहायक आचार्य डॉ रुचिता सुजय चौधरी ने ‘स्वयं प्रभा‘ चौनल के लिए 20 घंटे के मीडिया साक्षरता (अंग्रेज़ी) कोर्स की रिकॉर्डिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
यह कोर्स भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से संचालित स्वयं प्रभा डीटीएच चौनल संख्या 28 पर प्रसारित किया जाएगा। स्वयं प्रभा, उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के 40 डीटीएच चौनलों का एक समूह है, जो 24×7 जीसैट-15 सैटेलाइट के माध्यम से देश-विदेश के शिक्षार्थियों को ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराता है।
इस कोर्स की रिकॉर्डिंग 14 से 19 जुलाई, 2025 के बीच स्वयं प्रभा के मीडिया टेक्नोलॉजी सेंटर, कानपुर में संपन्न हुई। यह कोर्स वर्तमान समय के डिजिटल परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए मीडिया साक्षरता के महत्वपूर्ण आयामों जैसे कि मीडिया स्वामित्व, रिप्रेज़ेंटेशन, पूर्वग्रह, प्रोपेगेंडा, गलत सूचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया एल्गोरिदम, और सूचना प्रवाह के सामाजिक प्रभावों पर केंद्रित है।

  • कोर्स की मुख्य विषय वस्तु में शामिल हैं

  1. पारंपरिक बनाम डिजिटल मीडिया का विश्लेषण
  2. मीडिया संदेशों की व्याख्या (सेमियोटिक्स, विचारधाराएं)
  3. यूज़र-जनरेटेड कंटेंट व सोशल मीडिया में जनभागीदारी
  4. सूचना का नैतिक उत्पादन एवं मीडिया उपभोग
  5. फेक न्यूज़, मिसइन्फॉर्मेशन, डिसइन्फॉर्मेशन, और फैक्ट-चेकिंग
  6. एल्गोरिदम और फ़िल्टर बबल का सामाजिक प्रभाव
  7. डिजिटल अधिकार, ऑनलाइन प्राइवेसी, और डिजिटल फुटप्रिंट
  8. सामाजिक आंदोलनों में मीडिया की भूमिका

कुलपति प्रो अजय तनेजा ने डॉ चौधरी के इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘यह हमारे विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि हमारे संकाय सदस्य राष्ट्रीय मंच पर शिक्षा को समृद्ध कर रहे हैं। डॉ रुचिता सुजय चौधरी द्वारा विकसित किया गया यह कोर्स न केवल शिक्षार्थियों को मीडिया के प्रति सजग बनाएगा, बल्कि उन्हें ज़िम्मेदार, विचारशील और सूचना साक्षर नागरिक बनने की दिशा में सशक्त भी करेगा। साथ ही यह विश्वविद्यालय द्वारा ऑनलाइन शिक्षा की तरफ़ पहल भी है। डॉ चौधरी की यह उपलब्धि उनके विषय पर गहन अध्ययन, अकादमिक समर्पण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण दृष्टिकोण की पुष्टि करती है।

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