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लखनऊ में जुटेंगे देशभर के विधानसभा अध्यक्ष व पीठासीन अधिकारी, जनवरी में होगा सम्मेलन
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने मानसून सत्र की सफलता पूर्वक समाप्ति के बाद सोमवार को पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 20 और 21 जनवरी को होने वाली अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों की 86वाँ बैठक की मेजबानी उत्तर प्रदेश विधानसभा करेगी। इस बैठक में देशभर से विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी शामिल होंगे।
अध्यक्ष श्री महाना ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विधायी कार्यों के संचालन में आने वाली चुनौतियों, नवीन प्रथाओं तथा कार्यकुशलता पर चर्चा करना होगा। साथ ही, सभी राज्यों की विधानसभाओं के अनुभव साझा कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और इससे यहाँ की विधान प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा के संरक्षण में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का विस्तृत कार्यक्रम, लोकसभा की टीम के आगमन के उपरांत तय किया जाएगा। सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिनिधियों को प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव से परिचित कराने के लिए अयोध्या, काशी, मथुरा और कुशीनगर आदि पावन स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने अवगत कराया कि इससे पूर्व यह सम्मेलन पटना और उससे पहले मुंबई में सम्पन्न हुआ था। सम्मेलन के लिए प्रत्येक बार एक थीम निर्धारित की जाती है, जिस पर देश की सभी विधानसभाएँ अपने विचार प्रस्तुत करती हैं। तत्पश्चात् एक महत्त्वपूर्ण संकल्प पारित होता है और उसके कार्यान्वयन की जिम्मेदारी इस बार उत्तर प्रदेश को दी गई है।
सतीश महाना ने आगे बताया कि इस बार विधानसभा के मानसून सत्र में विधान कार्यों की उत्पादकता उल्लेखनीय रही। विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष दोनों ने अपनी सक्रिय भागीदारी से लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि पिछले संचालित अन्य सत्रों से भी अधिक इस 18वीं विधानसभा में सबसे अधिक सूचनाएं ली गई। विधानसभा की कार्यवाही 28.30 घंटे लगातार चली जिसमें सत्ता एवं विपक्ष के सदस्यों भाग लेकर सकारात्मक चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले सत्र में सदन की कार्यवाही लगातार 36 घंटे चली थी जिसमें विपक्ष के स्पोर्ट नहीं मिल पाया था। लेकिन इस बार विपक्ष के सभी सदस्यों के सकारात्मक सहयोग मिला।
उन्होंने बताया कि मानसून सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात खुलकर रखी। यही लोकतंत्र की वास्तविक खूबसूरती है। चार दिन के संक्षिप्त सत्र में जितना विधायी कार्य हुआ, उतना प्रायः लंबे सत्रों में भी नहीं हो पाता। कुल 32 घंटे 28 मिनट तक विधानसभा की कार्यवाही चली, जिसमें केवल 43 मिनट सदन स्थगित रहा। इस प्रकार स्थगन रहित समयावधि 31 घंटे 45 मिनट रही, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है।
श्री महाना ने बताया कि इस बार सदन में सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सभी सूचनाओं को ग्रहण किया गया। यह पहली बार हुआ है। नई नियमावली के अंतर्गत प्रत्येक सूचना पर सम्बन्धित विभाग से उत्तर प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे अब विभाग अधिक उत्तरदायी एवं सक्रिय हो गए हैं। श्री महाना ने कहा कि 29 मार्च 2022 को विधानसभा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद से प्रत्येक सत्र में कुछ नया करने का प्रयास किया गया है। परम्पराओं, संचालन और प्रक्रिया तीनों ही स्तरों पर निरंतर नवीनता लाने का कार्य हुआ है, ताकि विधानमंडल की गरिमा और लोकतंत्र की प्रतिष्ठा निरंतर समृद्ध होती रहे।
NAGARIK SATTA