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“वन नेशन, वन इलेक्शन” से मजबूत होगा लोकतंत्र: संगोष्ठी में वक्ताओं ने रखे विचार
रुद्रपुर। पंडित श्रीकृष्ण उपाध्याय महिला महाविद्यालय में मंगलवार को “वन नेशन, वन इलेक्शन” विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एकमत से कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव न केवल आर्थिक रूप से देश पर बोझ डालते हैं, बल्कि शासन और विकास की प्रक्रिया को भी बाधित करते हैं। एकसाथ चुनाव कराना न सिर्फ व्यय में कटौती करेगा, बल्कि लोकतंत्र को भी सुदृढ़ बनाएगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, पूर्व राज्य मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता नीरज शाही ने कहा कि बार-बार चुनाव होने से जनता पर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा, “वन नेशन, वन इलेक्शन की अवधारणा से न केवल संसदीय प्रणाली अधिक संगठित और प्रभावी होगी, बल्कि शासन भी सुचारु रूप से चल सकेगा। इससे जनता को बार-बार चुनावी माहौल से मुक्ति मिलेगी और विकास कार्य निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकेंगे।”
मुख्य वक्ता, बाबा राघवदास भगवानदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय बरहज के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि देश में अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों में अरबों रुपये खर्च होते हैं, जबकि एक साथ चुनाव कराने से यह खर्च लगभग आधे से भी कम रह जाएगा। उन्होंने कहा, “बचाए गए संसाधनों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे के विकास में किया जा सकता है। साथ ही बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से योजनाओं की गति रुकती है, जिसे वन नेशन, वन इलेक्शन के माध्यम से रोका जा सकता है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्रबंधक मदन उपाध्याय ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सुरक्षा बलों को बार-बार चुनाव ड्यूटी पर नहीं लगना पड़ेगा और राजनीतिक दल भी शासन व नीति निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
जिला संयोजक शिवम निषाद ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि “1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए गए थे और यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही थी।” उन्होंने अनुमान जताया कि “एक साथ चुनाव से चुनावी व्यय में लगभग 40 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है।”
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर शारदानन्द राय, निखिल गुप्ता, नन्हे पटेल, सत्यम पांडेय समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और छात्राएं उपस्थित रहे।
NAGARIK SATTA
