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कांग्रेस-राजद कई सीटों पर आमने-सामने
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दिल्ली की तरह राजद को भी कांग्रेस ने अकेला छोड़ दिया?
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बिहार में प्रमुख विपक्षी दल बनने का सपना देख रही कांग्रेस?
अभिषेक रंजन स्वतंत्र पत्रकार
लखनऊ। बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस सीएम फेस पर तो फ्रेंडली हो गई है लेकिन सीट शेयर को लेकर कांग्रेस अपने गठबंधन सहयोगी राजद से अनफ्रेंड क्यों हो गई है? इसको लेकर कई सवाल खड़े होते है कि क्या कांग्रेस राष्ट्रीय जनता दल राजद पर दबाव बनाने के लिए दस सीटों पर दोस्ताना लड़ाई लड़ रही है ? या फिर दिल्ली में आप पार्टी की ही तरह राजद को बिहार में अकेला छोड़ दिया है इस सोच के साथ की राजद के चुनाव जीतने से कांग्रेस को क्या मिलेगा? बिहार में राजद के साथ मिलकर कांग्रेस ने अगस्त और सितंबर में मतदाता अधिकार यात्रा निकाली थी। यह यात्रा विधानसभा चुनाव पर केंद्रित थी। यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने किया था। 17 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने बिहार के सासाराम से मतदाता अधिकार यात्रा की शुरुआत की थी। यात्रा 1 सितंबर को पटना में समाप्त हुई। यात्रा में आई भीड़ को देखने के बाद कांग्रेस अब बिहार में प्रमुख विपक्षी दल का सपना देख रही है। यही वजह है कि वह राजद पर सीट और सीएम चेहरों को लेकर दबाव बना रही थी लेकिन सीएम फेस पर कांग्रेस भले ही हथियार डाल दिए हो मगर महागठबंधन में गांठे मजबूत रहेंगी यह कहना मुश्किल है।
यात्रा में आई भीड़ को लेकर रादज का कहना है कि यह भीड़ कांग्रेस ने ही बल्कि राजद ने जुटाई थी। यही वजह थी कि कांग्रेस का बिना इंतजार किए राजद ने उन दस सीटों पर भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जिन पर कांग्रेस कई चुनाव से अपना झंडा गाड़े हुई थी। लालू यादव के इसी दांव के आगे कंग्रेस को हथियार डालने पड़े हैं। इसके बाद भी कांग्रेस अभी भी अपनी परंपरागत सीटों पर राजद का टसन झेल रही है। महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर सहमति न बन पाने के कारण कांग्रेस राजद के बीच कई सीटों पर सीधी टक्कर हो रही है जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही हैं। कुछ सीटों पर नामांकन वापसी के बाद भी विवाद बरकरार है जबकि कुछ में उम्मीदवारों ने समर्थन दिया है। वैशाली, सिकंदरा भागलपुर, कहलगांव भागलपुर, सुल्तानगंज भागलपुर, नरकटियागंज पश्चिम चंपारण, वारिसलीगंज नवादा है। बाद में वारिसलीगंज से कांग्रेस के राजेश कुमार ने नाम वापस ले लिया है। राजद ने 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे है जबकि कांग्रेस ने 61 पर चुनाव मैदान में है।
कांग्रेस 90 से 100 सीटें मांग रही थी जो अब 61 सीटों पर लड़ रही है। जबकि राजद ने 135-143 सीटें ले लीं। 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी लेकिन मात्र 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार राजद की मजबूत स्थिति (यादव-मुस्लिम वोट बैंक) और तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा बनाने की महत्वाकांक्षा के चलते कांग्रेस को मजबूरन कम सीटें स्वीकार करनी पड़ीं। राजद के दबाव के चलते कांग्रेस ने 100 से घटाकर 58 सीटें मानीं। इससे रजद की पकड़ चुनाव में मजबूत होती दिख रही है। गुरूवार को संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में कांर्ग्रेस के पूर्व सीएम अषोक गहलोत द्वारा तेजस्वी को सीएम चेहरा घोषित करने के बाद साफ हो गया है कि कांग्रेस की पकड़ चुनाव पर ढीली पड़ती जा रही है। बिहार में कांग्रेस का खुद का जनाधार कमजोर है। 2024 के आम चुनाव में कांर्ग्रेस को मात्र तीन पर ही संतोष करना पड़ा था। चुनाव से पहले कांग्रेस ने 68-70 सीटों पर सर्वे कराए और 25 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी जो कि राजद पर दबाव बनाने की कोशिश थी।
NAGARIK SATTA