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मेटाफोर लिटरेरी फेस्टिवल में साहित्य और संवेदना का संगम
लखनऊ। मेटाफोर लिटरेरी फेस्टिवल के 13वें संस्करण के उद्घाटन सत्र में बाल साहित्य को एक नई और प्रेरणादायक कृति मिली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने पूर्व आईएएस अधिकारी एवं प्रख्यात बाल साहित्यकार डॉ. अनिता भटनागर जैन की लोकप्रिय सपनों की उड़ान श्रृंखला की नवीन बाल कहानी ‘कब्बू की उड़ान’ के हिंदी एवं अंग्रेज़ी संस्करण का विधिवत विमोचन किया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि बाल साहित्य समाज की नींव को मजबूत करता है और बच्चों में संवेदनशीलता, आत्मविश्वास व सकारात्मक सोच का विकास करता है। उन्होंने डॉ. अनिता भटनागर जैन के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कहानियाँ बच्चों को न केवल मनोरंजन देती हैं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों से भी परिचित कराती हैं। ‘कब्बू की उड़ान’ जैसी कहानियाँ बच्चों को यह सिखाती हैं कि शारीरिक सीमाएँ सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं।
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कहानी का सार
‘कब्बू की उड़ान’ एक ऐसे छोटे से विकलांग कबूतर की प्रेरक कहानी है, जो शारीरिक कमजोरी के बावजूद बड़े सपने देखता है। कब्बू का सपना है कि वह दूर तक उड़ान भरकर ऐतिहासिक ताजमहल को अपनी आँखों से देखे। संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के माध्यम से कब्बू अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह कहानी बच्चों को यह संदेश देती है कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
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विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
विमोचन कार्यक्रम में हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक व निर्माता सुधीर मिश्रा, मेटाफोर लिटरेरी फेस्टिवल की संस्थापक कनक रेखा चौहान, तथा लखनऊ एक्सप्रेशन समिति के अध्यक्ष जयदीप नारायण माथुर सहित साहित्य, कला और संस्कृति जगत की अनेक प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा और संदेश की प्रशंसा की।
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लेखिका की प्रतिक्रिया
डॉ. अनिता भटनागर जैन ने इस अवसर पर कहा कि ‘कब्बू की उड़ान’ विशेष रूप से उन बच्चों के लिए लिखी गई है, जो किसी न किसी रूप में स्वयं को कमजोर या सीमित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहानी बच्चों को आत्मविश्वास, करुणा और समावेशन (इनक्लूज़न) का संदेश देती है।
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साहित्यिक उत्सव का सफल आग़ाज़
मेटाफोर लिटरेरी फेस्टिवल का उद्घाटन सत्र साहित्य, सिनेमा और समाज के बीच संवाद का सशक्त मंच बनकर उभरा। ‘कब्बू की उड़ान’ के विमोचन के साथ ही यह उत्सव बाल साहित्य और प्रेरक लेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
NAGARIK SATTA