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विधानसभा में नए मानदंडों की शुरुआत: बिना स्थगन चला शीतकालीन सत्र, सर्वसम्मति से गाया गया ‘वंदे मातरम‘

लखनऊ, 29 दिसम्बर। उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने ऐतिहासिक और कीर्तिमान स्थापित करने वाला बताया। सत्र के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही एक बार भी स्थगित नहीं हुई, जो विधानसभा की कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि इस सत्र में ‘वंदे मातरम्’ पर विस्तृत, सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई, जिसमें अधिकांश विधायकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार विधानसभा में सर्वसम्मति से ‘वंदे मातरम्’ गीत पूरा गाया गया, जो भविष्य में सदन के इतिहास में एक स्मरणीय उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा।

  • विधायी प्रक्रिया में गुणवत्ता पर जोर

सतीश महाना ने कहा कि अब विधानसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयकों पर अधिक से अधिक सदस्यों को चर्चा का अवसर दिया जा रहा है। इस सत्र में भी कई विधेयकों पर संशोधन प्रस्तावों सहित व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदस्यों से अपेक्षा की जा रही है कि वे विषय पर केंद्रित रहकर बोलें और अनावश्यक दोहराव से बचें। इसी उद्देश्य से विधायकों से सत्र से पहले विधेयकों का गहन अध्ययन कर आने का आग्रह किया गया है। अध्यक्ष के अनुसार, कई विधायकों ने इस पहल की सराहना की है और माना है कि पहली बार उन्हें विधेयकों पर वास्तविक और सार्थक चर्चा का अवसर मिला। पहले अक्सर विधेयकों की पूरी जानकारी न होने के कारण चर्चा प्रभावी नहीं हो पाती थी।

  • संवाद कार्यक्रम और नई कार्यसंस्कृति

अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान किए गए संवाद कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए श्री महाना ने कहा कि आगामी ‘संवाद कार्यक्रम’ में विधायकों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाएगा कि वे अगले सत्र में विधेयकों को पूरी तरह पढ़कर ही सदन में आएं। अब केवल हाथ उठाने के आधार पर बोलने का अवसर नहीं मिलेगा, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सदस्य विषय की सम्यक जानकारी के साथ चर्चा में भाग लें। अगले सत्र में किसी भी समय विधायकों से विधेयक की मूल भावना और प्रमुख प्रावधानों पर प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं।

  • सकारात्मक छवि और बढ़ता जनविश्वास

अपने 35 वर्षों के संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह संतोषजनक है कि अब विधायिका का सकारात्मक और रचनात्मक पक्ष सामने आ रहा है। इसमें मीडिया की भूमिका को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहले विधायिका को लेकर नकारात्मक धारणाएं अधिक थीं, लेकिन अब स्पष्ट रूप से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि विधानसभा भ्रमण के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, जिससे आमजन को विधायिका की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिल रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। यह बढ़ती जनभागीदारी विधायिका के प्रति मजबूत होते जनविश्वास को दर्शाती है।

  • AIPOC राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन

सतीश महाना ने जानकारी दी कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उद्घाटन 19 जनवरी को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे। 20 और 21 जनवरी को समसामयिक एवं संसदीय विषयों पर विचार-विमर्श होगा, जबकि सम्मेलन का समापन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा किया जाएगा। 22 जनवरी को देशभर से आए प्रतिनिधि अयोध्या दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे।

कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र ने न केवल कार्यवाही की निरंतरता और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक गंभीर, अध्ययनपरक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।

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