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विकास, समावेशन और प्रतिस्पर्धा के तीन कर्तव्यों पर आधारित है बजट
अखिलेश पाण्डेय,
नई दिल्ली, 1 फरवरी। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। यह बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है और इसे तीन प्रमुख कर्तव्यों, आर्थिक विकास को गति देना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और ‘सबका साथदृसबका विकास’, से प्रेरित बताया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत, लचीला और समावेशी बनाने की दिशा में ठोस कदम है।
बजट भाषण की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक बाजारों से मजबूत एकीकरण, निर्यात वृद्धि और दीर्घकालिक स्थिर निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान देगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाएं, नई तकनीकों का तेजी से उभार और ऊर्जा तथा जल संसाधनों की बढ़ती मांग प्रमुख चुनौतियां हैं, जिनका समाधान इस बजट में नीतिगत सुधारों के माध्यम से किया गया है।
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आर्थिक विकास को रफ्तार देने पर जोर
बजट का पहला कर्तव्य आर्थिक विकास को तेज करना और उसे बनाए रखना है। इसके तहत छह प्रमुख क्षेत्रों में हस्तक्षेप प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें रणनीतिक और सीमावर्ती क्षेत्रों में विनिर्माण का विस्तार, विरासत औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार, एमएसएमई को सशक्त बनाना, अवसंरचना पर सशक्त निवेश, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास शामिल है।
भारत को वैश्विक बायोफार्मा निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बायोफार्मा शक्ति योजना की घोषणा की गई है। इसके तहत बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना में तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (एनआईपीईआर) की स्थापना, सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन और 1000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल केंद्रों का नेटवर्क शामिल है।
एमएसएमई क्षेत्र को विकास का प्रमुख इंजन बताते हुए वित्त मंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी बजट का अहम हिस्सा है।
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अवसंरचना और संपर्क में बड़ा निवेश
कार्गाे और यात्री परिवहन को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों के संचालन की घोषणा की गई। इसके अलावा, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) के विकास के लिए सुधार-सह-परिणाम आधारित वित्तपोषण तंत्र के तहत प्रति सीईआर 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया है।
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लोगों की आकांक्षाएं और क्षमता निर्माण
बजट का दूसरा कर्तव्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से अब तक 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं। चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की गई है।
पशु चिकित्सा क्षेत्र में 20,000 से अधिक पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ऋण से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों में कंटेंट क्रिएशन लैब स्थापित की जाएंगी।
उच्च शिक्षा में छात्राओं की सुविधा के लिए प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। पर्यटन क्षेत्र में राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना और 20 पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों के कौशल उन्नयन की योजना भी घोषित की गई।
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सबका साथ सबका विकास की प्रतिबद्धता
बजट का तीसरा कर्तव्य ‘सबका साथ सबका विकास’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है। इसके तहत किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर तथा पूर्वाेदय और पूर्वाेत्तर राज्यों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कृषि क्षेत्र के लिए बहुभाषीय एआई टूल ‘भारत विस्तार’ का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने और जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। लखपति दीदी कार्यक्रम के विस्तार के तहत स्वयं सहायता समूहों के लिए सामुदायिक स्वामित्व वाले खुदरा आउटलेट स्थापित किए जाएंगे।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निमहांस-2 की स्थापना और रांची व तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन की घोषणा की गई है। पूर्वाेदय राज्यों और पूर्वाेत्तर क्षेत्र में औद्योगिक गलियारे, पर्यटन स्थलों और ई-बसों के प्रावधान का भी प्रस्ताव रखा गया है।
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राजकोषीय स्थिति और कर सुधार
वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटकर 55.6 प्रतिशत रहने की संभावना है। बजट में नया आयकर अधिनियम 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने, टीसीएस और टीडीएस को सरल बनाने, छोटे करदाताओं को राहत देने और कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने के प्रस्ताव शामिल हैं।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को वित्त मंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य की ओर एक मजबूत और संतुलित कदम बताया है, जो आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और दीर्घकालिक स्थिरता को एक साथ साधने का प्रयास करता है।
NAGARIK SATTA