लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान आलू किसानों को उचित मूल्य न मिलने का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। समाजवादी पार्टी के सदस्य आरके वर्मा ने कहा कि प्रदेश के आलू किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि एक बीघे में लगभग 46 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि किसान को मात्र 27 हजार रुपये ही प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने थोक और खुदरा कीमतों के बीच भारी अंतर का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस पर ठोस नीति लागू करने की मांग की।
इस पर जवाब देते हुए मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि विपक्ष के सदस्य ने अपने प्रश्न में ही उत्तर दे दिया है। उन्होंने कहा कि यदि उपज सस्ती बिक रही है तो इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों में कोई नया टैक्स नहीं लगाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत तय करना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि जब से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी है, तब से गेहूं और धान की खरीद के बाद किसानों के खातों में सीधे धनराशि भेजी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि 28 में से 24 राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक रूप से जीएसटी में कटौती की है जिसका कई राज्यों ने स्वागत किया है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि महंगाई नहीं है तो मंत्री जनता के बीच जाकर यह कहें, जनता स्वयं जवाब दे देगी। उन्होंने कहा कि अब आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है, बल्कि सदन की कार्यवाही को सकारात्मक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
NAGARIK SATTA

