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प्रकृति मानव जीवन की सबसे उदार शिक्षक है: आनंदीबेन पटेल

  • राज्यपाल ने एनबीआरआई में भ्रमण कर कैक्टाई एवं सैकुलेंट्स गृह, बोन्साई गृह, जुरासिक गैलरी तथा सायकेड गृह का अवलोकन किया

  • भारत की धरती पादप विविधिता की अनुपम धरोहर है

  • भारत की धरती को जलवायु विविधिता का वरदान प्राप्त है

लखनऊ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रविवार को सीएसआईआर नेशनल बाटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ में आयोजित बोगनविलिया ‘उत्सव-2026‘ के समापन अवसर पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज उन्हें वनस्पति उद्यान का अवलोकन करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई कि उन्हें लगभग 200 वर्ष पुराना एक वृक्ष भी दिखाया गया।

उन्होंने राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि लखनऊ में इतना महत्वपूर्ण और बड़ा वैज्ञानिक संस्थान कार्य कर रहा है, जहां वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनेक शोध किए जा रहे हैं तथा पौधों की नई-नई किस्में विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां विश्व के विभिन्न देशों से भी पौधों की प्रजातियां लाकर उनका संरक्षण एवं अध्ययन किया जा रहा है। इस प्रकार के संस्थानों की जानकारी होनी चाहिए। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि फूल केवल उद्यानों की शोभा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि हमारे जीवन में सौंदर्य, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि बोगेनवेलिया का पौधा हमें यह प्रेरणा देता है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी कठिन क्यों न हों, जीवन को सदैव खिलते रहना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन की सबसे उदार शिक्षक है। यह हमें सिखाती है कि सौंदर्य केवल बाहरी रूप में ही नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व, संतुलन और संरक्षण की भावना में भी निहित होता है। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, माली एवं प्रकृति प्रेमियों को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से न केवल उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रगति हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति समाज में जागरूकता भी बढ़ रही है। राज्यपाल ने सीएसआईआर-एनबीआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा बोगेनवेलिया की 25 से अधिक नई किस्मों के विकास तथा लगभग 200 से अधिक प्रजातियों के संरक्षण के कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुष्पकृषि किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषि के विविधीकरण को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने सीएसआईआर फ्लोरीकल्चर मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में लगभग 2,241 किसानों के लाभान्वित होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल हजारों परिवारों के जीवन में उगते हुए नए सपनों का प्रतीक है। उन्होंने भारत की धरती को पादप विविधता की अनुपम धरोहर बताते हुए कहा कि जब हमारे वैज्ञानिक नई प्रजातियों का विकास करते हैं और उनके संरक्षण का दायित्व निभाते हैं, तब वे समृद्ध जैव विविधता के सच्चे प्रहरी बन जाते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की धरती को विविध जलवायु का अद्भुत वरदान प्राप्त है, जो विभिन्न प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने वर्तमान कृषि बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हाई वैल्यू एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने, कृषि अनुसंधान को सुदृढ़ करने तथा रासायनिक खेती के स्थान पर केमिकल-फ्री एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने संस्थान को आयोजन के लिए बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह उत्सव आने वाले वर्षों में भी प्रकृति प्रेम, उद्यानिकी विकास और पर्यावरण संरक्षण की भावना को इसी प्रकार पुष्पित और पल्लवित करता रहेगा।

इस अवसर पर सर्वप्रथम राज्यपाल द्वारा राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान केंद्र का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान उन्होंने कैक्टाई एवं सैकुलेंट्स गृह, बोन्साई गृह, जुरासिक गैलरी तथा सायकेड गृह का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकार की कैक्टस प्रजातियों, पाइन्स, फर्न, सायकेड तथा बोन्साई पौधों को देखा तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन से संबंधित जानकारी प्राप्त की। उन्होंने संस्थान में संचालित शोध एवं संरक्षण गतिविधियों की सराहना की। संस्थान के वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने राज्यपाल को बोगनविलिया की विभिन्न प्रजातियों तथा उनके विकास एवं संरक्षण से संबंधित शोध कार्यों की जानकारी भी प्रदान की।

इस अवसर पर एनबीआरआई के निदेशक डॉ एके शसानी ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष तीन बार विभिन्न विषयों पर पुष्प एवं वनस्पति महोत्सव आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ये आयोजन मुख्य रूप से लखनऊ के नागरिकों को प्रकृति, पौधों की विविधता और उद्यानिकी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ केजी सिंह ने बोगनविलिया उत्सव के संबंध में संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि बोगनविलिया हमारे लिए गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष आयोजित प्रदर्शनी में 64 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनकी ओर से कुल 209 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। प्रतियोगिता का आयोजन 20 विभिन्न श्रेणियों में किया गया। इस अवसर पर महानिदेशक ट्रॉफी संयुक्त रूप से डॉ. पूर्णिमा सिंह एवं उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण को प्रदान की गई। वहीं निदेशक ट्रॉफी (संस्था एवं नर्सरी वर्ग) उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण को प्रदान की गई, जबकि निदेशक ट्रॉफी (व्यक्तिगत वर्ग) डॉ. पूर्णिमा सिंह को प्रदान की गई।

इसके अतिरिक्त विभिन्न श्रेणियों में सावनी यादव, लखनऊ विकास प्राधिकरण, सरिता सिंह, सुमन अग्रवाल, रंजिता अग्रवाल, सौरभ नर्सरी, सीएसआईआर-सीमैप, डॉ पूर्णिमा सिंह, रोहित वर्मा, हरीश कुमार तथा लखनऊ विश्वविद्यालय को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सीएसआईआर-एनबीआरआई के वैज्ञानिक, अधिकारी कर्मचारी एवं पुष्प प्रेमी उपस्थित रहे।

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