नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जनपद गौतमबुद्धनगर के जेवर में बहुप्रतीक्षित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (प्रथम चरण) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरपोर्ट के साथ कार्गो टर्मिनल का लोकार्पण और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधा का शिलान्यास भी किया गया।
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विकास का नया इंजन बना जेवर एयरपोर्ट
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह एयरपोर्ट “लोगों की अमानत, भविष्य और पुरुषार्थ” का प्रतीक है और यह युवाओं को नई उड़ान देने का माध्यम बनेगा। उन्होंने इसे “विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश” के नए अध्याय की शुरुआत बताया।
उन्होंने कहा कि यह एयरपोर्ट आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा। किसानों, लघु उद्योगों और युवाओं को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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एयर कनेक्टिविटी में बड़ा विस्तार
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे, जो अब बढ़कर 160 हो चुके हैं। ‘उड़ान’ योजना के तहत अब तक 1.6 करोड़ से अधिक लोग सस्ती हवाई यात्रा कर चुके हैं। सरकार आने वाले वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलिपैड बनाने की योजना पर काम कर रही है।
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रोजगार और निवेश के नए अवसर
एमआरओ सुविधा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब विमान रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और फ्रेट कॉरिडोर के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बनाएगा।
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उत्तर भारत के लिए ग्लोबल कनेक्टिविटी का बनेगा केंद्र : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह एयरपोर्ट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा और उत्तर भारत के लिए ग्लोबल कनेक्टिविटी का केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि भविष्य में यहां कुल 5 रनवे विकसित किए जाएंगे, जिससे यह दुनिया के बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिनटेक सिटी और अन्य औद्योगिक परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन होगा।
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खास बातें
- पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता
- भविष्य में 7 करोड़ यात्रियों तक विस्तार की योजना
- 3,900 मीटर लंबा रनवे, बड़े विमानों के लिए सक्षम
- 2.5 लाख मीट्रिक टन वार्षिक कार्गो क्षमता (भविष्य में 18 लाख टन तक)
- यमुना एक्सप्रेस-वे से बेहतर कनेक्टिविटी
- ग्रीनफील्ड और पर्यावरण अनुकूल परियोजना
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रणनीतिक महत्व
जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-एनसीआर के दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है, जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का पूरक बनेगा। इससे दिल्ली क्षेत्र में यात्री दबाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र को वैश्विक व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ते हुए विकास की रफ्तार को तेज करेगी।
NAGARIK SATTA