आयरलैंड में भारतीय मूल के डॉक्टरों ने पेशेवर सहयोग को मजबूत करने और भविष्य में आयरिश स्वास्थ्य व्यवस्था में सेवा देने के इच्छुक भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। यह पहल न केवल भारतीय चिकित्सा समुदाय के लिए सकारात्मक संकेत है, बल्कि भारत और आयरलैंड के स्वास्थ्य संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करती है।
काउंटी मीथ के एनफील्ड में आयोजित इंडियन आयरिश मेडिकल एसोसिएशन (IIMA) के पहले सम्मेलन में वरिष्ठ भारतीय डॉक्टरों ने आयरलैंड में भारतीय मूल के चिकित्सा पेशेवरों के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला। वर्तमान में 300 से अधिक भारतीय डॉक्टर आयरलैंड के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं और मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सम्मेलन में वक्ताओं ने बताया कि भारतीय डॉक्टर उच्च कौशल और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता रखते हैं, लेकिन इंटर्नशिप मान्यता और पंजीकरण से जुड़ी कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाएँ उनके लिए चुनौती बन जाती हैं। अब एसोसिएशन आयरिश अधिकारियों के साथ मिलकर इन प्रक्रियाओं को सरल और अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
इस पहल को आयरिश चिकित्सा परिषद का भी समर्थन मिला है। परिषद के प्रतिनिधियों ने भारतीय डॉक्टरों की गुणवत्ता और क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि वे दुनिया के किसी भी देश के डॉक्टरों के समान सक्षम हैं। परिषद ने पुष्टि की है कि पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों की एक औपचारिक समीक्षा शुरू की गई है, जिसके अगले छह महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
उपाध्यक्ष डॉ. मैरी डेवोरेन ने कहा कि विविधता किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है और परिषद इस दिशा में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा प्रशिक्षण के उच्चतम मानकों को बनाए रखना भी आवश्यक है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने आयरलैंड की स्वास्थ्य प्रणाली में भारतीय समुदाय के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि आयरलैंड में लगभग एक लाख भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं और भारतीय पेशेवर स्वास्थ्य सेवाओं की अग्रिम पंक्ति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
यह सम्मेलन आयरलैंड में भारतीय डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। यह न केवल उनकी उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक सहयोग, मान्यता और अवसरों की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। यह सामूहिक प्रयास भारतीय डॉक्टरों की वैश्विक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करता है तथा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में भारत की अग्रणी भूमिका को पुनः स्थापित करता है।
NAGARIK SATTA