लखनऊ। उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि की प्रबंधन समिति की 52वीं बैठक शुक्रवार को जन भवन में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं सैनिक पुनर्वास निधि की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने की। बैठक में निधि से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों, योजनाओं एवं वित्तीय विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए।
बैठक में सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा उनके आश्रितों के कल्याण के लिए संचालित वार्षिक शैक्षिक सहायता अनुदान योजना की समीक्षा की गई। इस दौरान निर्देश दिए गए कि उत्तर प्रदेश पुलिस एवं आर्म्ड फोर्सेज सहायता संस्थान, लखनऊ द्वारा संचालित योजना के अंतर्गत स्वीकृत पाठ्यक्रमों को अपनाया जाए। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा शुरू किए जा रहे नए पाठ्यक्रमों को भी योजना में शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
प्रबंधन समिति ने यह भी निर्देश दिए कि सैनिक पुनर्वास निधि की भूमि यदि किसी विभाग या संस्था को किसी उद्देश्य के लिए उपलब्ध कराई जाती है तो उसके बदले उचित प्रतिकर निधि को प्राप्त होना सुनिश्चित किया जाए, ताकि निधि के संसाधनों और हितों का संरक्षण किया जा सके।
बैठक में जिलाधिकारी हरदोई की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के आधार पर प्रदेश के 20 जनपदों में स्थित निधि की 49 दुकानों के मासिक किराए का निर्धारण आयकर विभाग द्वारा घोषित कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।
इसके अलावा युद्ध अथवा सैन्य कार्रवाई में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों और दिव्यांग सैनिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में प्राथमिकता देने के निर्देश भी जारी किए गए।
बैठक में 22 मार्च 2025 को आयोजित 51वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि की गई तथा 24 फरवरी 2026 को हुई बजट उपसमिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार बजट के अनुमोदन संबंधी प्रस्ताव पर विचार किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2024-25 के लाभ-हानि खाते एवं बैलेंस शीट के अनुमोदन पर भी चर्चा हुई।
बैठक के दौरान बजट उपसमिति में विशेष सचिव, सैनिक कल्याण अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन को सदस्य नामित किए जाने के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया। निधि द्वारा संचालित तीन प्रमुख योजनाओं के नामकरण के संबंध में भी चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
समिति के सदस्यों एवं संबंधित अधिकारियों ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याणार्थ संचालित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
NAGARIK SATTA