लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के संसदीय इतिहास में प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जुलाई 2008 से लगातार सेवा देते हुए उन्होंने विधानसभा के प्रमुख सचिव पद पर 18 वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इसके साथ ही वे इस पद पर सबसे लंबे समय तक निरंतर सेवा देने वाले अधिकारी बन गए हैं।
इससे पूर्व स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड पूर्व प्रमुख सचिव देवकी नंदन मित्तल के नाम दर्ज था, जिन्होंने 9 फरवरी 1956 से 1 मार्च 1974 तक लगभग 18 वर्ष तक सचिव विधानसभा के रूप में सेवाएं दी थीं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का संसदीय इतिहास 15 नवंबर 1909 से प्रारंभ होता है। इस दौरान अनेक विद्वान अधिकारियों ने संस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ब्रिटिश काल में विल्फ्रेड किंग पोर्टर ने 1909 से 1928 तक लगभग 19 वर्षों तक सेवा देकर सर्वाधिक लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड बनाया था। स्वतंत्रता के बाद कैलास चंद्र भटनागर, सत्य प्रिय सिंह, भाल चंद्र शुक्ल, प्रेम चंद सक्सेना तथा राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय सहित कई अधिकारियों ने विधानसभा की संसदीय परंपराओं को समृद्ध किया।
प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे को देश के अग्रणी संसदीय विशेषज्ञों में गिना जाता है। उनके संसदीय ज्ञान और अनुभव का लाभ पूर्ववर्ती सरकारों के साथ-साथ वर्तमान सरकार भी निरंतर लेती रही है। आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की विधानसभाएं भी उनसे परामर्श प्राप्त करती हैं।
श्री दुबे के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनेक नवाचार हुए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई है। विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली का पुनर्विरचन भी उनके नेतृत्व में किया गया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रक्रिया नियमावली की विस्तृत व्याख्या भी तैयार की है, जिसका विमोचन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया गया था।
संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार यह कृति भविष्य में विधायकों, शोधार्थियों, छात्रों तथा विधि विशेषज्ञों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इसकी तुलना संसदीय प्रक्रिया पर प्रतिष्ठित ग्रंथ “कौल एवं शकधर” से की जा रही है, जिसे इस विषय की सर्वोत्तम पुस्तकों में माना जाता है।
विधानसभा अध्यक्ष भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर चुके हैं कि उनके कार्यकाल में हुए अनेक नवाचार प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे के मार्गदर्शन और विशेषज्ञता के बिना संभव नहीं थे।
उल्लेखनीय है कि देश की विधायिकाओं में सचिवों और प्रमुख सचिवों का कार्यकाल अध्यक्ष के प्रसाद पर्यंत होता है तथा संसदीय अनुभव के कारण कई अधिकारी लंबे समय तक सेवाएं देते रहे हैं। ऐसे में प्रदीप कुमार दुबे का यह रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश विधानसभा ही नहीं, बल्कि देश की संसदीय परंपरा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास में प्रदीप कुमार दुबे का योगदान संसदीय परंपराओं, नवाचारों और विधायी प्रक्रियाओं के विकास के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा।
NAGARIK SATTA