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AKTU के 24वें दीक्षांत समारोह में 62,537 विद्यार्थियों को उपाधि, 84 मेधावियों को पदक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन महिला सशक्तिकरण का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा का कोई लिंग नहीं होता और बेटियां अपनी मेहनत, लगन तथा आत्मविश्वास के बल पर हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं।
मंगलवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के 24वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कुल 62,537 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में 55 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि तथा 84 मेधावियों को पदक दिए गए। पदक विजेताओं में 52 छात्राएं और 31 छात्र शामिल रहे। विश्वविद्यालय ने सभी उपाधियां और प्रमाणपत्र डिजीलॉकर पर भी उपलब्ध कराए। समारोह के दौरान राज्यपाल ने सीतापुर के 340 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आंगनबाड़ी किट वितरित की। साथ ही लखनऊ की 500 तथा सीतापुर की 435 सहित कुल 935 बेटियों के एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने राजकीय बालगृह (बालिका) सिंधीखेड़ा में स्थापित चार एयर कंडीशनर तथा विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए दो विद्यालयों में विकसित स्मार्ट क्लासों का भी लोकार्पण किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि परिस्थितियां नहीं, बल्कि परिश्रम, चरित्र और बड़े सपने व्यक्ति का भविष्य तय करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, विज्ञान, नवाचार और नैतिक मूल्यों के आधार पर विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नई जिम्मेदारी का प्रारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिस्पर्धा को दूसरों से आगे निकलने के बजाय स्वयं को बेहतर बनाने का माध्यम मानने की सलाह दी।
राज्यपाल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि इस वर्ष निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को राजकीय महाविद्यालयों की तुलना में अधिक पदक प्राप्त हुए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि सरकारी संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता, संसाधनों और मार्गदर्शन को और सुदृढ़ बनाया जाए, ताकि वहां के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल सकें। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने ए-प्लस नैक ग्रेड, एआईसीटीई आइडिया लैब, इंफोसिस मेकर्स लैब, इनक्यूबेशन सेंटर, 100 करोड़ रुपये की इनोवेशन निधि, कलाम पेटेंट सेंटर, भाभा टीचिंग असिस्टेंटशिप, स्पेस एवं क्वांटम टेक्नोलॉजी में माइनर डिग्री तथा फॉरेंसिक साइंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहलों को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में ऑनलाइन प्रश्नपत्र वितरण, ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन और सीसीटीवी आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था को पारदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी इसे लागू करने का सुझाव दिया।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में युवाओं को इन तकनीकों का उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान, भारतीय भाषाओं के संवर्धन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और मानव कल्याण के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक का निर्माता बन रहा है और इस परिवर्तन का नेतृत्व युवा करेंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, स्टार्टअप, शोध और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि ज्ञान को नवाचार से, नवाचार को राष्ट्र निर्माण से और राष्ट्र निर्माण को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष अरविंदर सिंह साहनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का तकनीकी शिक्षा तंत्र मजबूत है और यहां के विद्यार्थियों ने देश-विदेश में अपनी प्रतिभा साबित की है। उन्होंने विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया को डिग्रीधारकों से अधिक समस्या समाधान करने वाले नेतृत्वकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को “थिंक, अप्लाई एंड सॉल्व” का मंत्र देते हुए कहा कि क्षमता, चरित्र और आत्मविश्वास सफलता की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
समारोह में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए विद्यालयों और राजकीय बालगृह (बालिका) सिंधीखेड़ा के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। राज्यपाल ने प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों, एचपीवी टीकाकरण अभियान में योगदान देने वाले अधिकारियों तथा गोद लिए गए विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्टूडेंट स्टार्टअप अवार्ड भी प्रदान किए गए। प्रसिद्ध रोगन कला कलाकार आशीष शांतिलाल कंसारा को डी.लिट्. (मानद) उपाधि से सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में सहजन का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
NAGARIK SATTA

