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गंगा दयाल मिश्र की पुण्यतिथि पर श्री रैनाथ ब्रह्मदेव महाविद्यालय में वृक्षारोपण व श्रद्धांजलि सभा
सलेमपुर, देवरिया। शिक्षा, संस्कार और सेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री रैनाथ ब्रह्मदेव महाविद्यालय, सलेमपुर में रविवार को संस्थापक प्रबंधक स्वर्गीय गंगा दयाल मिश्र की पुण्यतिथि श्रद्धा, स्मरण और संकल्प के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम ने पूरे परिसर को भावनाओं और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से ओत-प्रोत कर दिया। मानो एक ओर श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए जा रहे थे, तो दूसरी ओर भविष्य की हरियाली के बीज रोपे जा रहे थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंधक पंडित दीन दयाल मिश्र, निदेशक राज मणि मिश्र एवं प्राचार्य डॉ. अजय कुमार मिश्र ने पौधारोपण कर किया। राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की तीनों इकाइयों के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सत्येन्द्र मिश्र, डॉ. अजीत कुमार पाण्डेय एवं विन्ध्याचल दुबे ने स्वयंसेवकों के साथ परिसर में छायादार एवं फलदार पौधे लगाए तथा उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा में महाविद्यालय परिवार, शिक्षक, कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिकों ने स्व. गंगा दयाल मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि स्व. मिश्र केवल एक संस्थापक ही नहीं, बल्कि शिक्षा के ऐसे युगदृष्टा थे जिन्होंने ज्ञान की ज्योति से पूरे क्षेत्र को आलोकित किया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व, सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज सेवा की भावना ने हजारों विद्यार्थियों के जीवन को नई दिशा दी। उनके द्वारा स्थापित यह संस्थान आज भी ज्ञान, संस्कार और सेवा के मूल्यों को आत्मसात करते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
प्रबंधक पंडित दीन दयाल मिश्र ने कहा कि वृक्ष प्रकृति का अमूल्य उपहार हैं। जिस प्रकार स्व. गंगा दयाल मिश्र ने शिक्षा का वटवृक्ष रोपकर समाज को नई चेतना दी, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
निदेशक श्री राज मणि मिश्र ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है कि वह पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प ले।
प्राचार्य डॉ. अजय कुमार मिश्र ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं और वृक्षारोपण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
NAGARIK SATTA