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युवा शक्ति ही असंभव को संभव बना सकती है : सर्वलोकानंद महाराज
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स्वामी विवेकानंद की चिंतन शक्ति एवं शिक्षाएं विश्व के लिए प्रेरणा : प्रो पीके शर्मा
मेरठ। स्वामी विवेकानन्द के महासमाधि दिवस पर स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानन्द शोध पीठ द्वारा स्वामी विवेकानन्द के दर्शन के मूल मूल्य विषय पर दूसरा राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया।
सत्यजीत रे प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह, विशिष्ट अतिथि रामकृष्ण मिशन दिल्ली के सचिव सर्वलोकानंद महाराज, कुलपति प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा, दिगंबर जैन कॉलेज बड़ौत के एचओडी डॉ स्नेहवीर सिंह, मंगलायतन विवि से प्रो. सिद्धांत जैन, जेएमएस ग्रुप के महानिदेशक प्रो. सुभाष गौतम, सीसीएस यूनिवर्सिटी से डॉ अजीत सिंह, प्रतिकुलपति कर्नल देवेन्द्र स्वरूप, कुलसचिव एम याकूब एवं सेमिनार की संयोजक प्रो. डॉ मोनिका मेहरोत्रा ने स्वामी विवेकानन्द के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
मुख्य अतिथि महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द भारत की संस्कृति और अध्यात्म के प्रतीक है। स्वामी विवेकानन्द ने युवाओं को संस्कार से जोड़ने पर अधिक बल दिया, जिसका हमें अनुपालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता का मूल मंत्र चरित्रवान आचरण है, इसके माध्यम से जीवन में सफलता मिलती है। उन्होंने छात्र छात्राओं को स्वामी विवेकानंद के आदर्शो पर चलने का संकल्प दिलाया एवं महापुरूषों को सम्मान देने के लिए सुभारती विश्वविद्यालय के द्वारा किये जा रहे कार्यो की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि रामकृष्ण मिशन दिल्ली के सचिव सर्वलोकानंद महाराज ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनके दर्शन के मूल्य मनुष्य का निर्माण करते है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही असंभव को संभव बना सकती है। भारत देश युवाओं का देश है, सभी युवाओं को चाहिए की स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए अपने अंदर चरित्र निर्माण के साथ राष्ट्रहित में कार्य करें। उन्होंने सुभारती विश्वविद्यालय का नाम स्वामी विवेकानन्द के नाम पर होने पर गर्व प्रकट करते हुए कहा कि सुभारती समूह देश के हर महापुरूषों के इतिहास को युवाओं के उत्थान हेतु कार्य कर रहा है, यह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने स्वामी विवेकानंद को नमन करते कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा के माध्यम से समाज की दशा बदलने केे साथ युवाओं का मार्ग दर्शन किया है। उनका प्रसिद्ध वचन ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए, यह संदेश आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। उनकी चिंतन शक्ति एवं शिक्षाएं विश्व के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि इसी प्रेरणा से सुभारती विश्वविद्यालय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपना कर समाज में शिक्षा, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रीयता की भावना को रोपित कर रहा है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि उपाधि महाविद्यालय पीलीभीत के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ दुष्यत कुमार ने स्वामी विवेकानन्द के आदर्श एवं नई शिक्षा नीति को जोड़ते हुए वर्तमान समय पर इसकी महत्ता पर सभी का ज्ञान वर्धन किया।
दिगंबर जैन कॉलेज बड़ौत के एचओडी डॉ स्नेहवीर सिंह ने तकनीकी सत्र में स्वामी विवेकानंद केे जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं पर विस्तार से व्याख्यान देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करना समय की आवश्यकता है।
सेमिनार की मुख्य संयोजक व स्वामी विवेकानन्द शोध पीठ की अध्यक्ष प्रो. डॉ मोनिका मेहरोत्रा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द युवाओं के आदर्श है और उन्हीं के विचारों को विश्वविद्यालय युवा पीढ़ी में रोपित कर रहा है। उन्होंने स्वामी विवेकानन्द शोध पीठ द्वारा उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर किये जा रहे अनुसंधान एवं विभिन्न कार्यो से सभी अतिथियों को रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सेमिनार में लगभग 200 प्रतिभागियों ने शिरकत की। सेमिनार के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत किये गए। इसके साथ ही स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया गया
राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजक सचिव डॉ अश्वनी कुमार, सह संयोजक डॉ दुर्वेश पुंडिर एवं डॉ नियति गर्ग रहे। मंच का संचालन शोधार्थी अर्चना ने किया। वंदेमातरम गायन से कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ.पिंटू मिश्रा, डॉ आरके घई, डॉ सोकिन्द्र कुमार, कर्नल राजेश त्यागी, डॉ मनोज कुमार त्रिपाठी, डॉ रूबी, डॉ स्वाती शर्मा, मौ.आसिफ सिद्दीकी, आदेश कुमार, जूली, डॉ लवली आदि सहित सभी संकाय विभाग के डीन, अध्यक्ष, शिक्षक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहें।
NAGARIK SATTA