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पूर्वांचल के ग्रामीण इलाकों में भी पहुंचा स्वच्छ पेयजल

  • अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन वाटरएड इंडिया व दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि के संयुक्त अध्ययन ने लगाई मुहर

  • पंचायती राज के प्रतिनिधि, स्थानीय निकाय और जिला से लेकर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के सहयोग से हर जिले के पांच-पांच गांवों का सर्वे

लखनऊ, 12 जुलाई। पूर्वांचल के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र की दशा और दिशा बदल दी है। जल जीवन मिशन के प्रभाव का आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठन वाटरएड इंडिया और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि के जियोग्राफी डिपार्टमेंट ने पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल के तीन जिलों गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज में विस्तृत अध्ययन किया। तीन महीने तक समूह चर्चा, साक्षात्कार और आंकड़ों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला कि इस योजना ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता के क्षेत्रों में व्यापक सकारात्मक बदलाव किए हैं।
पंचायती राज के प्रतिनिधि, स्थानीय निकाय और जिला से लेकर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के सहयोग से हर जिले के पांच-पांच गांवों का सर्वे कर परिवर्तन का गहनता से अध्ययन किया गया है।

  • अब अधिकांश परिवार नल के पानी का कर रहे उपयोग

वाटरएड इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वांचल के 93 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक अब नल से शुद्ध और सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है। पहले जहां लोग कुएं, हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर निर्भर थे, वहीं अब अधिकांश परिवार पीने से लेकर खाना पकाने तक के लिए नल के पानी का उपयोग कर रहे हैं। इससे पुराने जल स्रोतों पर निर्भरता में भारी कमी आई है।

  • स्वास्थ्य में सुधार, बीमारियों पर नियंत्रण

स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों में जल जनित और संक्रामक रोगों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार अब लोगों को पेट संबंधी बीमारियों, त्वचा रोगों और दस्त जैसी समस्याओं से राहत मिल रही है। इससे न केवल चिकित्सा खर्च कम हुआ है, बल्कि लोगों की कार्यक्षमता भी बढ़ी है।

  • शिक्षा में बढ़ी भागीदारी, स्कूलों में नल कनेक्शन

जल जीवन मिशन के तहत स्कूलों में भी नल कनेक्शन पहुंचने से स्वच्छता स्तर में सुधार हुआ है। बच्चों को शुद्ध पानी मिल रहा है जिससे वे कम बीमार पड़ते हैं। इसका सीधा असर शैक्षिक उपस्थिति में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर में कमी के रूप में सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि अब बच्चे अधिक नियमित रूप से स्कूल जा रहे हैं।

  • स्थानीय रोजगार सृजन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल

पाइपलाइन बिछाने, पानी की टंकी का निर्माण और देखरेख जैसे कार्यों में स्थानीय लोगों को काम मिला है। इससे ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी हुई है और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। खासकर तकनीकी कार्यों के लिए प्रशिक्षित युवाओं को लाभ मिला है।

  • महिलाओं को मिला सम्मान, सामाजिक समरसता को बढ़ावा

पहले जहां महिलाओं को मीलों दूर से पानी लाना पड़ता था, वहीं अब नल का जल घर तक पहुंचने से उनका श्रम और समय दोनों बच रहा है। महिलाएं अब अन्य रचनात्मक कार्यों में भागीदारी कर रही हैं। समाज में भेदभाव की स्थिति में भी कमी आई है, जिससे सामाजिक समरसता और पारिवारिक सौहार्द बढ़ा है।

  • गांवों में गहन अध्ययन, ग्रामीणों ने जताया संतोष

इस त्वरित अध्ययन में प्रत्येक जिले के पांच-पांच गांवों को शामिल किया गया। सर्वे में भाग लेने वाले अधिकतर ग्रामीणों ने माना कि हर घर जल योजना ने उनके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन किया है। स्वच्छ जल की उपलब्धता ने उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन जीने का भरोसा दिया है।

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