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स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे अन्य मसलों पर नही हो पाई चर्चा
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वेल में हंगामा और धरने के चलते जनहित के मुददों पर नहीं आ पाए माननीय के सुक्षच
अभिषेक रंजन, स्वतंत्र पत्रकार
लखनाऊ। विधान मंडल सत्र के दौरान विपक्ष सत्ता पक्ष की कमियों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है और विपक्ष का प्रयास होता है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्याान आकृष्ट कराएं। सरकार के खिलाफ तमाम विषयों को भी सदन में रखती है। कभी-कभी विपक्ष सरकार को वाक ओवर देने का भी काम करता है। सोमवार को शुरू हुए मानसून सत्र के दौरान कुछ ऐसा ही देखने को मिला और मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही के दौरान हंगामें के जरिए विपक्ष ने तो सुर्खिया बटोरी लेकिन शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़े मसले पर हंगामा के कारण चर्चा नहीं हो पाई। सत्ता पक्ष को इस मसले पर जवाब देने से बचने का मौका विपक्ष ने बिना कहे ही दे दिया।
विधानमण्डल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हुआ। सत्र को लेकर के विधानमण्डल के सदस्य काफी उत्साहित रहते हैं जिनके जनहित के सवाल अल्पसूचित तारांकित प्रश्न के तहत विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा बनते हैं। इस मानसून सत्र में सपा सदस्य डा रागिनी सोनकर, पल्लवी पटेल समेत कई अन्य सदस्यों ने सरकार से स्वास्थ्य जैसे विषय पर सवाल किया था। डा रागिनी ने सरकार से जानना चाहा कि प्राथमिक विद्यालयों बंद कर उनका विलय करना क्या भारतीय संविधान अनुच्छेद 21 ए-नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उलंघन है? इसी प्रकार सपा सदस्य अरमान खान नें प्रदेश के डिप्टी सीएम से जानना चाहा कि किन जनपदों के चिकित्सालयों में अतिगंभिर मरीजों के इलाज के लिए आईसीयू, पीआईसीयू, एनआईसीयू, सीआईसीयू, ओआईसीयू के कितने बेड स्थापित हैं। क्या सरकार बताएगी उपरोक्त में अतिगंभिर मरीजों के लिए वर्तमान में क्या व्यवस्था है? ऐसे कई अन्य सवाल चिकित्सा शिक्षा चिकित्सा स्वाथ्य, खाद्य एवं औषधि नियंत्रण दुग्ध विकास, बाल विकास पुष्टाहार पशुधन विभाग से जुड़े थे जिनका जवाब लिखित तौर पर सरकार ने दे दिया लेकिन विपक्ष के हंगामें के कारण ऐसे गंम्भीर मुद्दों पर सदन में न तो चर्चा हो पाई न तो विपक्ष द्वारा सुझाव आ पाया।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा के वरिष्ठ सदस्य संग्राम सिंह यादव ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के साथ गोरखपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उनके साथ अभद्रता किए जाने और उन्हें काले झंडे दिखाए जाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडेय गोरखपुर में विरासत गलियारा में व्यापारियों की दुकाने ध्वस्त किए जाने के मुदृदे पर उनसे मिलने और उनकी समस्या जानने गए थे लेकिन वहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने न सिर्फ उनका रास्ता रोका बल्कि उनसे अभद्रता की। सपा सदस्य ने इस पूरे प्रकरण पर जांच की मांग कराए जाने की मांग उठाई। सदन में मौजूद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय स्वयं भी अपने साथ हुई अभद्रता और जिला पुलिस प्रशासन द्वारा पर्याप्त सहयोग न दिए जाने की बात कही। सपा के सदस्य इसी मुदृदे पर सदन की कार्यवाहीं रोककर चर्चा कराए जाने की मांग करने लगे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। विधान सभा अध्यक्ष सतीष महाना के बार-बार आग्रह के बावजूद सदस्य अपने आसन पर जाने को तैयार नहीं हुए। सपा सदस्यो के शोरशराबे और हंगामें के चलते विधानसभा की कार्यवाही पहले पन्द्रह मिनट फिर बारह बजकर बीस मिनट तक के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की कार्यवाहीं के पुन: शुरू होने के बाद भी सपा के सदस्य धरने पर बैठे रहे। इस बीच विधानसभा की कार्यवाही चलती रही।
इसी हंगामें के बीच विधायी कार्य निपटाए गए और सदन की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन की कार्यवाही स्थागित होने से सदस्यों के सवालों के लिखित जवाब तो आ गए लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर सदन में चर्चा नहीं हो पाई। कई सदस्य ऐसे सवालों पर पूरी तैयारी करते हैं और सरकार से चर्चा के दौरान अपने विधान सभा क्षेत्र की उप विषयों से जुड़े मसलों को भी उठाते हैं लेकिन हंगामें की वजह से सदस्यों की मेहनत रंग नहीं ला पाई। विपक्षी दल के सदस्यों को निराशा लगी होगी लेकिन वह भी पार्टी के प्रोटोकाल से बंधे हुए हैं। इन सबके बीच सवाल खड़ा होता है कि जनता जन प्रतिनिधियों को चुनकर सदन भेेजती है ताकि उनके विषयों पर सरकार से चर्चा हो लेकिन अक्सर ऐसे गंभीर मसलों पर विपक्ष खबरों की सुर्खियां तो बनता है लेकिन जनता के मसले सुर्खियाों में नहीं आ पाते हैं।
NAGARIK SATTA