लखनऊ। बच्चों में भारत की सांस्कृतिक और पारम्परिक संस्कारों की नींव रखते हुए आज एमिटी इंटरनेशनल स्कूल विराज खंड, गोमतीनगर में रामलीला मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कहानी का भव्य आयोजन हर्षाेल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम में नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी, कक्षा 1 और कक्षा 2 के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया जिसकी शुरुआत अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुई, तथा उसके बाद गायत्री मंत्र के जाप के साथ दीप प्रज्वलन से दिव्यता का आह्वान किया गया, जिससे सभागार में आध्यात्मिक वातावरण बन गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या रचना मिश्रा ने समस्त अतिथि का स्वागत करते हुए उन्होंने विद्यालय की प्रेरणा स्रोत एमिटी इंटरनेशनल स्कूल की अध्यक्षा डॉ. अमिता चौहान के प्रति आभार प्रकट किया तथा माता-पिता, शिक्षकों और विद्यार्थियों सहित सभी उपस्थित लोगों का असत्य पर सत्य की विजय का समारोह मनाने में उनकी भागीदारी और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रामलीला नृत्य-नाटिका मंचन था जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को दिखाया गया, जिन्हें उनके धर्म और कर्तव्य के गुणों के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में सम्मानित किया गया। युवा छात्रों ने श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण जैसे पात्रों को चित्रित करते हुए उत्साह और शालीनता के साथ प्रदर्शन किया और मंच पर महाकाव्य को जीवंत रूप दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध हिंदी शिक्षाविद् लिली भट्ट्याचार्या ने रामायण से प्राप्त नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए रामलीला के सार को आधुनिक जीवन में अपनाने का आग्रह किया। रामलीला के समापन के बाद, भगवान राम का (राज्याभिषेक) किया गया, जो बुराई पर उनकी विजय के बाद शांति और समृद्धि का प्रतीक है।
कार्यक्रम का समापन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की कड़ी मेहनत को स्वीकार करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसने कार्यक्रम को दीप्तिमान सफलता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानाचार्या रचना मिश्रा ने रामलीला के मुख्य पात्रों राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ अग्रिम यात्रा का नेतृत्व किया और रावण दहन का औपचारिक आयोजन किया। माता पिता और छात्रों ने उत्साहपूर्वक धूमधाम यात्रा का अनुसरण किया और बुराई पर इस प्रतीकात्मक जीत के साथ उत्सव का समापन किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों पर इस मंचन ने एक अनूठी छाप छोड़ी और जीवन में धार्मिकता और नैतिक मूल्यों के महत्व को मजबूत किया।
NAGARIK SATTA
