लखनऊ। रूसी-भारतीय संयुक्त उद्यम कंपनी काइनेट ने नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय रेलवे उपकरण प्रदर्शनी में एक नए हाई स्पीड स्लीपर कोच का पहला डिज़ाइन प्रदर्शित किया है। काइनेट, रूसी रोलिंग स्टॉक कंपनियों और भारत सरकार के स्वामित्व वाली रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के बीच एक संयुक्त उद्यम है जो 120 भारतीय वंदे भारत हाई-स्पीड ट्रेनों के निर्माण और रखरखाव के लिए है।
काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस के परियोजना निदेशक निशंक गर्ग ने कहा कि संयुक्त उद्यम द्वारा अगले साल जून में अपने पहले प्रोटोटाइप का अनावरण किए जाने की उम्मीद है, जिसका निर्माण दिसंबर के अंत तक शुरू हो जाएगा। गर्ग ने बताया कि कंपनी ने भारत के पश्चिमी महाराष्ट्र राज्य के लातूर स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र में पहले स्लीपर कोच की कार बॉडी का निर्माण पूरा कर लिया है। काइनेट ने प्रति ट्रेन ₹1.2 अरब (14.61 मिलियन यूस डालर) की सबसे कम कीमत पेशकश की उसके बाद यह टेंडर जीता है, जिसमें उसने जर्मन दिग्गज सीमेंस, फ्रांस की एल्सटॉम ट्रांसपोर्ट और स्विट्जरलैंड की स्टैडलर रेल जैसी प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया है। उन्होंने बताया कि कंपनी का लक्ष्य अगले साल तक पहली वंदे भारत स्लीपर कोच ट्रेन तैयार करना है। उन्होंने आगे बताया कि लातूर स्थित उनके कारखाने में प्रदर्शन के लिए एक कोच, कार बॉडी, का निर्माण पहले ही किया जा चुका है। संयुक्त उद्यम के माध्यम से निर्मित ट्रेनों का उपयोग भारतीय रेलवे के वंदे भारत कार्यक्रम के लिए किया जाएगा, जो 2019 में शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य लंबी दूरी के यात्रा मार्गों का आधुनिकीकरण और परिवहन दक्षता बढ़ाना है।
भारतीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रदर्शनी में बोलते हुए कहा कि नई दिल्ली अगली पीढ़ी की हाई-स्पीड ट्रेनों पर काम कर रही है, जिसमें निर्यात बाजार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मध्य एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के प्राथमिक निर्यात बाजार होने की उम्मीद है। वैष्णव ने कहा कि भारत वर्तमान में वंदे भारत 3.0 का संचालन कर रहा है, जो इसके पिछले संस्करणों की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। और उन्होंने कहा कि 2047 तक 7,000 किलोमीटर समर्पित यात्री गलियारे बनाने की योजना है। साथ ही भारतीय रेलवे 4500 नई वंदे भारत ट्रेनें खरीदने की योजना बना रहा है। यह लगभग 65 बिलियन अमेरिकी डॉलर का ऑर्डर बुक है।
NAGARIK SATTA