अखिलेश पाण्डेय,
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संयुक्त प्रेस वार्ता में राष्ट्रपति पुतिन ने भारत आगमन पर मिले गर्मजोशी भरे स्वागत और सार्थक वार्ता के लिए सबका आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री मोदी और भारत की जनता को रूसी प्रतिनिधिमंडल के गर्मजोशी भरे और सत्कारपूर्ण स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूँ। प्रधानमंत्री मोदी के साथ रात्रिभोज पर मेरी बातचीत हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के लिए बहुत उपयोगी रही। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच वर्षों से स्थापित मजबूत संवाद प्रणाली लगातार सुदृढ़ हो रही है।
राष्ट्रपति पुतिन ने भारत रूस व्यापारिक संबंधों में सकारात्मक प्रगति का उल्लेख किया कि “पिछले वर्ष हमारे द्विपक्षीय व्यापार में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिसने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। हम वर्तमान में अनुमान लगा रहे हैं कि इस वर्ष का व्यापार समझौता उसी प्रभावशाली स्तर पर बना रहेगा। पुतिन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय मुद्दों और चुनौतियों की एक महत्वपूर्ण सूची साझा की है जिन पर दोनों सरकारों को ध्यान देना चाहिए, और हम उन पर कार्रवाई करेंगे। भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने से इसमें मदद मिलेगी।
ऊर्जा साझेदारी को लेकर भी पुतिन ने आश्वस्त किया कि रूस भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार और भी विस्तृत करने पर काम होगा। संयुक्त प्रेस वार्ता ने यह स्पष्ट किया कि भारत और रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होने जा रही है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने का वादा दोनों नेताओं ने किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज भारत और रूस के तेईसवें शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। उनकी यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हमारे द्विपक्षीय संबंध अनेक ऐतिहासिक पड़ावों से होकर गुज़र रहे हैं। ठीक 25 वर्ष पहले राष्ट्रपति पुतिन ने हमारी रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी थी। 15 वर्ष पहले, वर्ष 2010 में हमारी साझेदारी को “विशेष और विशिष्ट रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा प्राप्त हुआ। पिछले ढाई दशकों में उन्होंने अपने नेतृत्व और दूरदृष्टि से इन संबंधों को निरंतर सुदृढ़ किया है। हर परिस्थिति में उनके नेतृत्व ने हमारे आपसी संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। भारत के प्रति उनकी गहरी मित्रता और अटूट प्रतिबद्धता के लिए मैं राष्ट्रपति पुतिन, अपने मित्र, का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले आठ दशकों में विश्व में अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं। मानवता को अनेक चुनौतियों और संकटों से गुज़रना पड़ा है। किन्तु इन सबके बीच भारत–रूस की मित्रता ध्रुवतारे की तरह अडिग बनी रही। पारस्परिक सम्मान और गहरे विश्वास पर आधारित ये संबंध समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। आज हमने इस मजबूत नींव को और सुदृढ़ करने के लिए सहयोग के सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना हमारी साझा प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से आज हमने वर्ष 2030 तक के लिए एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर सहमति बनाई है। इससे हमारा व्यापार और निवेश अधिक विविधीकृत, संतुलित तथा टिकाऊ बनेगा और सहयोग के नए क्षेत्र विकसित होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संपर्क और आवागमन बढ़ाना हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। हम अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारे, उत्तरी समुद्री मार्ग तथा चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेंगे। मुझे प्रसन्नता है कि अब हम भारत के नौसैनिक कर्मियों के लिए ध्रुवीय जलक्षेत्रों में प्रशिक्षण हेतु सहयोग करेंगे। यह न केवल आर्कटिक क्षेत्र में हमारे सहयोग को नई शक्ति देगा, बल्कि भारत के युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी उत्पन्न करेगा। इसी प्रकार जहाज़-निर्माण के क्षेत्र में हमारा गहरा सहयोग “मेक इन इंडिया” अभियान को सशक्त बनाने की क्षमता रखता है। यह हमारी पारस्परिक लाभकारी सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे रोजगार, कौशल-विकास और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा भारत–रूस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण और मजबूत स्तंभ रहा है। असैनिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा दशकों पुराना सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा के हमारे साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने में अत्यंत सहायक रहा है। हम इस पारस्परिक लाभकारी सहयोग को आगे भी जारी रखेंगे। महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में हमारा सहयोग वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और विविधीकृत आपूर्ति शृंखलाएँ सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इससे स्वच्छ ऊर्जा, उच्च-तकनीक विनिर्माण तथा नवयुगीन उद्योगों में हमारी साझेदारी और सुदृढ़ होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और रूस के संबंधों में सांस्कृतिक सहयोग तथा जन-से-जन संपर्क का विशेष महत्व रहा है। दशकों से दोनों देशों के लोगों में एक-दूसरे के प्रति स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का भाव रहा है। इन संबंधों को और मजबूत करने के लिए हमने कई नए कदम उठाए हैं। हाल ही में रूस में भारत के दो नए वाणिज्य दूतावास खोले गए हैं। इससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क और भी सुगम होगा और आपसी निकटता बढ़ेगी। इस वर्ष अक्टूबर में काल्मिकिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में लाखों श्रद्धालुओं को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का दर्शन प्राप्त हुआ।
मुझे प्रसन्नता है कि हम शीघ्र ही रूसी नागरिकों के लिए निःशुल्क 30-दिवसीय ई-पर्यटक वीज़ा तथा 30-दिवसीय समूह पर्यटक वीज़ा की शुरुआत करने जा रहे हैं। जन-शक्ति गतिशीलता हमारे लोगों को जोड़ने के साथ-साथ दोनों देशों के लिए नई शक्ति और नए अवसर उत्पन्न करेगी। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि इसे बढ़ावा देने के लिए आज दो समझौते किए गए हैं। हम मिलकर व्यावसायिक शिक्षा, कौशल-विकास और प्रशिक्षण पर भी कार्य करेंगे। हम दोनों देशों के विद्यार्थियों, विद्वानों और खिलाड़ियों के आदान-प्रदान को भी बढ़ाएँगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की। यूक्रेन के संबंध में भारत ने शुरुआत से ही शांति और संवाद का पक्ष लिया है। हम इस विषय के शांतिपूर्ण और स्थाई समाधान हेतु किए जा रहे सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं। भारत हमेशा अपना योगदान देने के लिए तत्पर रहा है और आगे भी रहेगा। आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत और रूस लंबे समय से कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते आए हैं। पहलगाम में हुआ आतंकी हमला हो या क्रोकस सिटी हॉल पर किया गया कायरतापूर्ण हमला—इन सभी की जड़ एक ही है। भारत का दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर सीधा प्रहार है और इसके विरुद्ध वैश्विक एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। भारत और रूस के बीच संयुक्त राष्ट्र, जी–20, ब्रिक्स, एससीओ तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करीबी सहयोग रहा है। आगे भी सशक्त तालमेल के साथ हम इन सभी मंचों पर अपना संवाद और सहयोग जारी रखेंगे।
NAGARIK SATTA