Breaking News

विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली में गुणवत्ता मानकों की स्थापना पर लोक सभा अध्यक्ष ने पुनः दिया ज़ोर

  • 86वें AIPOC के दूसरे दिन प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और जवाबदेही पर गहन विचार-विमर्श

लखनऊ, 20 जनवरी। लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के दूसरे दिन विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने को लेकर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान तीन प्रमुख एजेंडा विषयों पर पूर्ण सत्रीय विचार-विमर्श किया गया। इनमें पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, विधायकों की क्षमता-वृद्धि के माध्यम से कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना, तथा जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल रहे। सम्मेलन के पूर्ण सत्रों में लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला उपस्थित रहे, जबकि चर्चा का संचालन राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री महाना द्वारा देश भर की विधायिकाओं में अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली में प्रभावी रूप से समाहित किया गया है। इसके साथ ही, विधायकों की शैक्षणिक योग्यताओं और पेशेवर अनुभवों की पहचान कर उनके रचनात्मक उपयोग की पहल को भी उन्होंने प्रशंसनीय बताया।

पूर्ववर्ती अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों के प्रमुख विमर्शों को स्मरण करते हुए श्री बिरला ने कहा कि उत्कृष्टता, नवाचार और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे गुणवत्ता मानकों पर राज्य विधायिकाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आवश्यक है। उन्होंने वर्ष 2019 में देहरादून में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य विधायिकाओं की कार्यकुशलता और प्रक्रियागत सुधार के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाया गया है। इस दिशा में गठित एक समिति वर्तमान में भारत में विधायी निकायों की प्रक्रियाओं और प्रथाओं के मानकीकरण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार कर रही है।

इस अवसर पर राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश ने विधान मंडलों की कार्यकुशलता बढ़ाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने एआई को उपयुक्त, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक कदमों की जानकारी दी। साथ ही, संसद में एआई के व्यावहारिक उपयोग और इसके क्रियान्वयन के विभिन्न तरीकों को रेखांकित करते हुए संसद और राज्य विधान मंडलों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि संस्थागत ज्ञान का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

सम्मेलन का तीसरा एवं अंतिम दिन 21 जनवरी 2026 को आयोजित होगा। इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन संबोधन देंगे। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे और सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

About Nagarik Satta

Check Also

स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप की संगीतमय शाम में गूंजे सदाबहार फिल्मी गीत, कलाकारों ने बांधा समां

लखनऊ। स्वरलहरी म्यूजिकल ग्रुप की ओर से आयोजित सदाबहार हिंदी फिल्मी गीतों की संगीतमय शाम …

यूपी के 2.24 करोड़ से किसानों के खाते में आई 4482.19 करोड़ रुपये की ‘सम्मान निधि’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को गुजरात के बनासकांठा से जारी की प्रधानमंत्री किसान सम्मान …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *