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सरलीकृत नीतियों व तेज फैसलों से योगी सरकार ने कारोबार के लिए आसान बनाया
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एकल खिड़की प्रणाली और डिजिटल प्रक्रियाओं से उद्यमियों को मिला भरोसेमंद माहौल
लखनऊ, 23 जनवरी। एक समय था जब उत्तर प्रदेश में कारोबार शुरू करने का विचार आते ही फाइलों के अंबार, जटिल नियम और विभागीय चक्करों की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती थी। निवेशक संभावनाएं तो देखते थे, लेकिन प्रक्रियाओं की जटिलता उन्हें आगे बढ़ने से रोक देती थी। आज वही उत्तर प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की मिसाल बनकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यह परिवर्तन किसी एक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किए गए सुनियोजित, निर्णायक और निरंतर सुधारों की देन है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस व्यवस्थागत सुधारों से आता है। इसी सोच के साथ व्यापारिक वातावरण को सरल, पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल बनाने की दिशा में व्यापक सुधारों की शुरुआत की गई। इन प्रयासों का असर अब राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग और निवेशकों के भरोसे में साफ दिखाई देता है।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की रैंकिंग इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है। वर्ष 2017-18 में बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) रैंकिंग में उत्तर प्रदेश 12वें स्थान पर था। सुधारों की तेज रफ्तार के चलते वर्ष 2019 में प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया। वर्ष 2021 के गुड गवर्नेस इंडेक्स में वाणिज्य एवं उद्योग श्रेणी में उत्तर प्रदेश ने शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद 2022 और 2024 में राज्य को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में ‘टॉप अचीवर’ का दर्जा मिला। लॉजिस्टिक्स रैंकिंग में भी 2022, 2023 और 2024 में उत्तर प्रदेश ‘अचीवर्स’ की श्रेणी में रहा।
बीआरएपी 2024 के तहत उत्तर प्रदेश को उद्यम स्थापना, श्रम विनियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और भूमि प्रशासन जैसे तीन अहम क्षेत्रों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। वर्ष 2024 के बाद BRAP और BRAP-प्लस के अंतर्गत सरकार ने 24 क्षेत्रों में 426 बड़े सुधार लागू किए। उद्यम स्थापना, भूमि सुधार, श्रम पंजीकरण, पर्यावरण स्वीकृतियां, सिंगल विंडो सिस्टम और निर्माण अनुमति जैसी प्रक्रियाओं को सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाया गया।
इन सभी सुधारों की धुरी बना ‘निवेश मित्र’, जो देश के सबसे बड़े डिजिटल सिंगल विंडो पोर्टल्स में शामिल है। इस पोर्टल के माध्यम से 45 विभागों की 525 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से भी एकीकृत है, जिससे राज्य और केंद्र की प्रक्रियाएं आपस में जुड़ गई हैं। अब तक 20 लाख से अधिक डिजिटल स्वीकृतियां और 97 प्रतिशत से अधिक निस्तारण दर यह साबित करती है कि यह सिस्टम केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रभावी ढंग से काम कर रहा है।
योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि लाइसेंस और स्वीकृतियों के लिए कोई भी भौतिक आवेदन स्वीकार न हो। सभी प्रक्रियाएं केवल निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से की जा रही हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी और मानवीय हस्तक्षेप व भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुईं। यूजर फीडबैक के अनुसार निवेश मित्र से जुड़े 96 प्रतिशत उपयोगकर्ता संतुष्ट हैं, जो डिजिटल गवर्नेंस में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने के लिए ‘निवेश मित्र 3.0’ विकसित कर रही है। यह एआई आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड से लैस होगा, जिसमें रियल-टाइम डेटा एनालिसिस, शिकायत निवारण और व्हाट्सएप, ईमेल व ऐप के जरिए त्वरित सूचना व्यवस्था शामिल होगी। निवेश मित्र 3.0 को आईजीआरएस, निवेश सारथी, ओआईएमएस, इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड ‘दर्पण’ से जोड़ा जाएगा, जिससे एक एकीकृत और अत्यंत कुशल डिजिटल इकोसिस्टम तैयार होगा।
नियामक अनुपालनों को सरल करना योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। लगभग 65 विभागों में 4,675 अनुपालनों को कम किया गया, 4,098 को सरल और डिजिटल बनाया गया। 577 अनुपालनों को अपराधमुक्त किया गया और 948 पुराने अधिनियमों, नियमों व विनियमों को निरस्त किया गया। अब प्रदेश में व्यापार के लिए केवल उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्य अधिष्ठान अधिनियम-1962 के तहत पंजीकरण ही पर्याप्त है। ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है और 20 से कम कर्मचारियों वाली दुकानों के लिए पंजीकरण की आवश्यकता भी खत्म कर दी गई है।
अग्निशमन, श्रम, परिवहन और विधिक माप विज्ञान विभागों के तहत कई अपराधों को डिक्रिमिनलाइज किया गया है। औद्योगिक शांति अधिनियम में कारावास के प्रावधान को हटाना सरकार के विश्वास-आधारित और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। आज उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या या भूगोल के कारण नहीं, बल्कि स्थिर नीतियों, डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी प्रशासन के कारण निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
NAGARIK SATTA