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उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘विकसित भारत’ की दिशा में युवा संसद का ऐतिहासिक अध्याय

अखिलेश पाण्डेय,

लखनऊ । 01 से 03 मई 2026 के बीच लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश विधानसभा का विधानमंडप एक अनूठे उत्साह, ऊर्जा और विचार-समृद्ध संवाद का साक्षी बना। अवसर था ‘राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद 2026’ का जिसका आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के मार्गदर्शन में ‘मेरा युवा भारत’ द्वारा किया गया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में प्रदेश के 75 जनपदों से चयनित 375 युवाओं ने भाग लिया और ‘केंद्रीय बजट 2026: विकसित भारत 2047 की ओर युवाओं के मार्ग को सुदृढ़ बनाना‘ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं था बल्कि विचारों का उत्सव, लोकतंत्र का जीवंत पाठ और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका का सशक्त प्रदर्शन था। हर वक्ता को 3 मिनट का समय मिला, किंतु इन तीन मिनटों में युवाओं ने जिस गहराई, तथ्यात्मक मजबूती और दूरदर्शिता के साथ अपनी बात रखी, उसने यह सिद्ध कर दिया कि नई पीढ़ी अवसर तलाशने वाली ही नहीं अवसर सृजित करने वाली भी है।

स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि और “वंदे मातरम” के सामूहिक गायन ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। उस क्षण सदन में केवल स्वर नहीं, बल्कि “राष्ट्र प्रथम” का सामूहिक संकल्प गूंज रहा था। सतीश महाना ने युवाओं से कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा अपने भीतर राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखेंगे। बृजेश पाठक ने युवाओं को जोखिम लेने, नवाचार अपनाने और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी। गिरीश चंद्र यादव ने युवा संसद को लोकतंत्र की प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि यहां युवा केवल श्रोता नहीं, बल्कि सक्रिय सहभागी बनते हैं।

  • बजट से भविष्य की रूपरेखा तक

युवा संसद का केंद्रीय विषय “केंद्रीय बजट 2026 और विकसित भारत 2047” महज आर्थिक विमर्श नहीं था बल्कि राष्ट्र के दीर्घकालिक भविष्य की रूपरेखा पर संवाद था। वक्ताओं ने रोजगार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और हरित अर्थव्यवस्था जैसे आयामों को बजट से जोड़ते हुए बताया कि यह दस्तावेज युवाओं की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। कई प्रतिभागियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि युवाओं के सुझावों को नीति-निर्माण में शामिल करने की प्रक्रिया ने बजट को सहभागी और समावेशी स्वरूप दिया है। इस संदर्भ में ‘विकसित भारत 2047’ का विजन केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अभियान के रूप में सामने आया।

  • दूसरा दिन: विचार से नीति और क्रियान्वयन तक

दूसरे दिन 180 युवाओं ने अपने विचार रखे। यहां स्पष्ट रूप से देखा गया कि युवाओं ने केवल दृष्टिकोण नहीं रखा, बल्कि उसे नीति, क्रियान्वयन और प्रभाव से जोड़ा। तर्कों में आंकड़े थे, दृष्टि में समाधान था और प्रस्तुति में आत्मविश्वास। अधिकांश प्रतिभागियों के लिए यह पहली बार था जब वे विधानसभा परिसर में पहुंचे। उनके लिए यह अनुभव “लोकतंत्र को जीने” जैसा था। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण विधानसभा के आधिकारिक यूट्यूब चौनल पर हुआ, जिसे प्रदेशभर से हजारों लोगों ने देखा। निर्णायक मंडल में विधायक डॉ. नीरज बोरा, विधायक डॉ. सुरभि और विधायक शशांक वर्मा शामिल रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों को संसदीय प्रक्रिया, तर्क प्रस्तुति और नेतृत्व कौशल पर मार्गदर्शन दिया।

  • समापन दिवस: युवा चेतना का उत्सव

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह मंच युवाओं की आत्मशक्ति के जागरण का पर्व है। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026 को युवाशक्ति आधारित बताते हुए उद्यमिता, नवाचार और कौशल विकास में युवाओं की भूमिका रेखांकित की। इस अवसर पर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी युवाओं को प्रेरित किया। तीन दिनों तक चली इस युवा संसद ने यह सिद्ध कर दिया कि जब 75 जनपदों की युवा शक्ति एक मंच पर आती है, तो वह केवल संवाद नहीं करती, बल्कि साझा दृष्टि का निर्माण करती है।

  • विजेता और आगे की राह

प्रतियोगिता में जालौन के अंकित कुमार ने प्रथम, बलिया की शिप्रा सिंह ने द्वितीय और कानपुर नगर की रश्मि रंजन साहू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। ये तीनों प्रतिभागी अब नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय विकसित भारत युवा संसद में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस सामूहिक प्रक्रिया की जीत है, जिसमें जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक युवाओं को मंच, मार्गदर्शन और अवसर मिला।

  • लोकतंत्र का जीवंत पाठ और नेतृत्व का प्रशिक्षण

यह आयोजन युवाओं के लिए संसदीय परंपराओं, नीति-निर्माण की जटिलताओं और नेतृत्व कौशल को समझने का जीवंत पाठ बन गया। यहां हार जीत से अधिक सीखने, सुनने और समझने की भावना प्रमुख रही। प्रतिभागियों ने एक दूसरे के विचारों को आत्मसात किया, नए दृष्टिकोण अपनाए और लोकतांत्रिक संवाद की संस्कृति को अनुभव किया। ‘मेरा युवा भारत’ प्लेटफॉर्म ने इस पूरी प्रक्रिया में सेतु का कार्य किया, जिला स्तर पर प्रतिभा खोजने से लेकर विधानसभा के मंच तक पहुंचाने तक।

  • युवाओं के हाथों में विकसित भारत की रूपरेखा

‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना तभी साकार होगी जब युवा केवल दर्शक नहीं, भागीदार बनेंगे। राज्य स्तरीय विकसित भारत युवा संसद 2026 ने यह दिखाया कि उत्तर प्रदेश का युवा जागरूक है, संगठित है और संकल्पित है। तीन दिनों तक विधानसभा में गूंजती तालियां, तथ्यपूर्ण तर्क, राष्ट्र के प्रति समर्पण और भविष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टि, इन सबने मिलकर यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य सुरक्षित हाथों में है। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है, युवाओं को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में स्थापित करने की प्रक्रिया। जब युवा शक्ति राष्ट्र के लिए चिंतन करती है, तो इतिहास के पन्नों में सचमुच नए अध्याय जुड़ते हैं। लखनऊ की इस युवा संसद ने ऐसा ही एक अध्याय रचा है जहां विचारों ने संकल्प लिया और संकल्प ने दिशा।
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विकसित भारत युवा संसद 2026 बना लोकतांत्रिक सीख का मंच

उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ के प्रथम दिवस पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए युवा प्रतिभागियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निकट से देखा, समझा और अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। यह आयोजन युवाओं के लिए केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से सीधे जुड़ने का अवसर साबित हुआ। जनपद इटावा की सौम्या गुप्ता ने इसे गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि इस मंच ने उनके भीतर जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति की भावना को और प्रखर किया। वहीं जौनपुर की प्रांशी उपाध्याय ने विधानसभा की कार्यवाही को करीब से देखने को अद्भुत अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि माननीय मंत्रियों के उद्बोधन से केंद्रीय बजट 2026-27 के दूरगामी लक्ष्यों को समझने का अवसर मिला और तर्कपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की कला सीखी। प्रतिभागी आर्यव्रत्त और अमन सिकरवार ने युवा संसद को नेतृत्व क्षमता निखारने वाला मंच बताया, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों को व्यवहार में समझने का अवसर मिला। हाथरस के शुभम ने विधानसभा परिसर में प्रवेश को ‘नेतृत्व का अनुभव’ बताया और कहा कि वहां का अनुशासन और गरिमा अत्यंत प्रेरणादायक रही।

आगरा की कनक चौहान और प्रगति उपाध्याय ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री के समक्ष विचार रखना उनके लिए अविस्मरणीय रहा। शामली की खुशी ने लोकतंत्र को जिम्मेदारी के रूप में महसूस करने की बात कही। आज़मगढ़ की सुषमा पांडेय, बागपत के शिवम दांगी और सपना राणा ने बजट, कौशल विकास, रोजगार और महिलाओं की प्रगति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। सपना राणा ने कहा कि वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए बोल रही थीं जिन्हें आगे बढ़ने से रोका जाता है, और अब उनका लक्ष्य यूपीएससी है। अलीगढ़ के प्रियांशु भारद्वाज, अंबेडकर नगर के सत्यम वर्मा, संत रविदास नगर (भदोही) के सोनू यादव, कुशीनगर के बासु प्रसाद गोंड, मेरठ के सावन कुमार और हमीरपुर के सूरज कुमार ने भी इस मंच को युवाओं की आवाज़ को नीति-निर्माण से जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बताया। प्रतिभागियों ने शिक्षा, डिजिटल प्रगति, ग्रामीण विकास, किसान कल्याण और युवा रोजगार जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा की भव्यता, अनुशासन और गरिमा ने सभी प्रतिभागियों को गहराई से प्रभावित किया। युवाओं ने माना कि यह अनुभव उन्हें एक जागरूक, जिम्मेदार और सक्रिय नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। ‘विकसित भारत युवा संसद 2026’ ने यह सिद्ध किया कि आज का युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सक्रिय भागीदार है। इस पहल ने युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और विकसित भारत 2047 के संकल्प से जुड़ने की प्रेरणा दी।

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