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गांव से दुनिया तक: सेवा, कौशल और तकनीक से आत्मनिर्भर भारत की नई तस्वीर

  • स्वर्ण भारत ट्रस्ट के रजत जयंती समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण सशक्तीकरण को विकसित भारत के संकल्प का आधार बताया

वेंकटचलम (नेल्लौर), आन्ध्र प्रदेश। भारत के विकास की असली तस्वीर गांवों के बदलते जीवन में दिखाई देती है। जब शिक्षा के साथ कौशल जुड़ता है, तकनीक गांव की चौखट तक पहुंचती है, महिलाओं को आर्थिक अवसर मिलते हैं और पारम्परिक हुनर को आधुनिक बाजार मिलता है, तब विकास केवल आंकड़ों में नहीं रहता, बल्कि आम नागरिक के जीवन में बदलाव के रूप में दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आन्ध्र प्रदेश के वेंकटचलम, नेल्लौर में स्वर्ण भारत ट्रस्ट के रजत जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए इसी व्यापक दृष्टि को रेखांकित किया। उन्होंने स्वर्ण भारत ट्रस्ट की 25 वर्षों की सेवा यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि अक्षरा विद्यालय के माध्यम से शिक्षा और कौशल का जो समन्वित मॉडल विकसित किया गया है, वह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ट्रस्ट द्वारा शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और ग्रामीण स्वावलम्बन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य इस बात का उदाहरण हैं कि सामाजिक संस्थाएं सरकारी प्रयासों के साथ मिलकर विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश का युवा नई सम्भावनाओं और अवसरों से जुड़ रहा है। आज तकनीक और वैश्विक अर्थव्यवस्था ने युवाओं के सामने अवसरों का दायरा व्यापक कर दिया है। ऐसे में युवाओं को देश और दुनिया में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना चाहिए, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार, आधुनिक भारत का युवा अपनी संस्कृति पर गर्व करे, अपनी विरासत को समझे और समाज के प्रति संवेदनशील रहे। ‘नेशन फर्स्ट’ अर्थात राष्ट्र सर्वोपरि की भावना उसके व्यक्तित्व का हिस्सा होनी चाहिए। आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वतंत्रता का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया भी है।

स्वर्ण भारत ट्रस्ट के कौशल विकास प्रयासों की चर्चा करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशिक्षण से लेकर कम्प्यूटर शिक्षा तक युवाओं को ऐसे कौशल दिए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से वे रोजगार प्राप्त करने के साथ स्वयं का कारोबार भी शुरू कर सकते हैं। ग्रामीण युवाओं के लिए आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण उन्हें बदलती अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रहा है। ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास इसी आत्मनिर्भरता की कड़ी है।

इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, मुरादाबाद की पीतल कला, फिरोजाबाद का कांच, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की चिकनकारी जैसे उत्पाद प्रदेश की समृद्ध कारीगरी परम्परा की पहचान हैं। चुनौती यह थी कि पीढ़ियों से इन हुनरों को जीवित रखने वाले कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, पूंजी और बाजार उपलब्ध नहीं था। ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ और ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के माध्यम से पारम्परिक कारीगरों को डिजाइन प्रशिक्षण, आधुनिक टूल किट, आसान ऋण तथा विपणन और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उद्देश्य कारीगरों से उनका पारम्परिक हुनर छीनना नहीं, बल्कि उसी हुनर को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ना है। यही दृष्टिकोण स्थानीय कौशल को वैश्विक अवसर में बदल सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण केवल सुरक्षा और सम्मान तक सीमित नहीं हो सकता; उसे आर्थिक आत्मनिर्भरता से भी जोड़ना होगा। ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन को प्राथमिकता दी गई है। ‘बैंकिंग सखी’ इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है। ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण और डिजिटल उपकरण देकर बैंकिंग सेवाओं को गांवों में लोगों के दरवाजे तक पहुंचाया जा रहा है। गांव की बेटियां बैंक और ग्रामीण जनता के बीच सेतु बन रही हैं और इस प्रक्रिया में स्वयं भी आय अर्जित कर रही हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण वित्तीय समावेशन के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी मजबूत करती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक अन्य पक्ष के रूप में मुख्यमंत्री ने गोवंश संरक्षण का उल्लेख किया। प्रदेश में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं और निराश्रित गोवंश को अपने घर में पालने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे संरक्षण और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहयोग दोनों उद्देश्यों को साथ साधने का प्रयास किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह भेदभाव नहीं करती। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अन्तरण (डीबीटी) के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था ने वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। टेली-एजुकेशन और टेली-मेडिसिन जैसी सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की पहुंच बढ़ाने का माध्यम बन रही हैं। स्वर्ण भारत ट्रस्ट द्वारा ड्रोन तकनीक, ऑटोकैड और जीआईएस जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण युवाओं को दिया जा रहा है। स्मार्टफोन और डिजिटल साधनों के माध्यम से गांव का युवा अब अपने स्थानीय परिवेश से ही देश और दुनिया के बाजारों से जुड़ने की सम्भावना तलाश रहा है।

मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इन्सेफेलाइटिस के खिलाफ किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए स्वच्छता और जनजागरूकता को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ा। उनके अनुसार, घर-घर शौचालय निर्माण, स्वच्छता अभियान और व्यापक जनजागरूकता के कारण इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ और इससे होने वाली मौतों में अभूतपूर्व कमी आई। स्वर्ण भारत ट्रस्ट के स्वास्थ्य सेवा प्रयासों को भी उन्होंने इसी सेवा भावना से जोड़ा। पिछले लगभग 20 वर्षों से आयोजित किए जा रहे निःशुल्क चिकित्सा शिविर और नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 12 लोगों की शल्य चिकित्सा जरूरतमन्दों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयास हैं। आन्ध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सम्बन्धों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य, जगद्गुरु निम्बार्काचार्य, भगवान बुद्ध और आचार्य नागार्जुन जैसी परम्पराएं उत्तर और दक्षिण को ज्ञान एवं संस्कृति के सूत्र में जोड़ती हैं। भाषाएं और दिशाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन भारत की ज्ञान परम्परा और सांस्कृतिक चेतना देश को एक सूत्र में बांधती है।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को रेखांकित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस यात्रा में गांवों की भूमिका केंद्रीय है। सरकार नीतियों और योजनाओं से अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन उन अवसरों को जनशक्ति में बदलने के लिए समाज और सेवा संस्थाओं की सहभागिता आवश्यक है। स्वर्ण भारत ट्रस्ट की 25 वर्षों की यात्रा इसी साझी जिम्मेदारी का एक उदाहरण है। शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयास यह संकेत देते हैं कि विकसित भारत का रास्ता केवल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि सशक्त गांवों से होकर भी गुजरता है। सरकार, समाज और सेवा संस्थाओं की सम्मिलित शक्ति ही उस भारत की आधारशिला रख सकती है, जहां गांव का नागरिक अवसरों का लाभार्थी मात्र नहीं, बल्कि विकास की यात्रा का सक्रिय सहभागी हो।

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