श्रीधर अग्निहोत्री,
हिंदी सिनेमा में नायक, खलनायक, चरित्र अभिनेता, सभी की अपनी अपनी पहचान होती है। परंतु कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो अपने किरदार में इस तरह ढल जाते हैं कि वे स्वयं उस किरदार का पर्याय बन जाते हैं। ऐसे ही एक अनोखे कलाकार थे जगदीश राज खुराना, जिनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज है, सबसे अधिक बार एक ही भूमिका निभाने वाले अभिनेता के रूप में। और यह भूमिका थी पुलिस अधिकारी की।
1928 में ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के सरगोधा (अब पाकिस्तान में) में जन्मे जगदीश राज ने जीवन की शुरुआत फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में की थी। 1939 में महबूब खान की फिल्म ‘एक ही रास्ता’ में उन्होंने अभिनय किया। परंतु उनका असली फिल्मी सफर शुरू हुआ 1955 में बलराज साहनी और नूतन अभिनीत फिल्म ‘सीमा’ से, जहाँ उन्होंने एक डॉक्टर की छोटी सी भूमिका निभाई।
चार दशकों से अधिक चले इस शानदार करियर में उन्होंने 325 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन जो चीज़ उन्हें अमर बनाती है, वह है, 144 बार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाना, जो उन्हें ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में स्थान दिलाती है। दीवार, डॉन, शक्ति, सिलसिला, मजदूर, गोपीचंद जासूस, बेशरम, आईना जैसी फिल्मों में वे वर्दी में नजर आए, और उनके चेहरे की गंभीरता, संवाद अदायगी की ठोस शैली, वर्दी की गरिमा, सब कुछ इतना सजीव था कि दर्शक उन्हें सच में पुलिस इंस्पेक्टर समझ बैठते थे।
उनकी बेटी, अभिनेत्री अनीता राज ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके पिता वर्दी को लेकर इतने संवेदनशील थे कि घर में उसे सलीके से इस्त्री करवा कर रखते थे, मानो वह कोई धर्म हो। कई बार आम लोग उन्हें असल जीवन में भी इंस्पेक्टर या पुलिस कमिश्नर समझ लेते थे।
जगदीश राज सिर्फ वर्दी वाले किरदारों तक सीमित नहीं थे। उन्होंने धूल का फूल, धर्मपुत्र, वक्त, हमराज, इत्तेफाक, और नीलकमल जैसी फिल्मों में भी अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। कुछ बी-ग्रेड फिल्मों में उन्होंने नायक की भूमिका भी निभाई, लेकिन वर्दी से उनका रिश्ता कुछ ऐसा था कि जैसे वह उनके व्यक्तित्व में रच-बस गया हो।
एक बार उन्होंने स्वयं कहा था कि “मुझे नहीं पता कि दर्शकों ने मुझे केवल एक पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में ही क्यों अपनाया, जबकि मैंने कई बार अन्य भूमिकाएँ भी कीं।” एक दिलचस्प किस्सा भी उन्होंने साझा किया, एक हॉलीवुड कास्टिंग डायरेक्टर हार्वे वुड ने जब वर्षों बाद उन्हें देखा, तो हैरान होकर कहा, “अरे बाप रे! तुम अब भी उसी वर्दी में हो!”
28 जुलाई 2013 को उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। उस समय वे 85 वर्ष के थे। उनके पीछे उनका परिवार अनीता राज, रूपा मल्होत्रा और बॉबी राज छूट गया, और पीछे छूट गया उनका वर्दी में गढ़ा हुआ एक इतिहास, जो आज भी हर फिल्म प्रेमी के दिल में सजीव है।
जगदीश राज अपने आप में एक संस्था थे, एक चलती-फिरती मिसाल कि वफादारी सिर्फ किसी भूमिका से नहीं, बल्कि उस किरदार की आत्मा से होती है।
NAGARIK SATTA