लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने संभावित बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की और सभी जिलाधिकारियों को समन्वय और सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सभी जिलाधिकारी केन्द्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के साथ तालमेल बनाकर स्थलीय निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि जन-धन की क्षति न हो। उन्होंने राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाओं और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था पर बल दिया।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गांवों में जलभराव की स्थिति बनती है, वहां पशुओं की सुरक्षा, चारे की व्यवस्था और गो-आश्रय स्थलों की तैयारी हो। राज्य और जिला स्तर पर 24×7 राहत कंट्रोल रूम सक्रिय रहें और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व अन्य टीमें भी पूरी तरह अलर्ट मोड में रहें।
मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि बाढ़ के दौरान संभावित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्लोरीन टैबलेट, ओआरएस और दवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि प्रदेश के 24 जिले अति संवेदनशील और 13 जिले संवेदनशील की श्रेणी में हैं। इनमें महाराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बलिया, देवरिया, सिद्धार्थनगर आदि प्रमुख जिले हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग, प्रमुख सचिव राजस्व पी. गुरुप्रसाद सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
NAGARIK SATTA