लखनऊ/टोक्यो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने 29 अगस्त (शुक्रवार) को टोक्यो में आयोजित भारत-जापान आर्थिक फोरम में शिरकत की। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और कीदानरेन (जापान व्यापार महासंघ) द्वारा आयोजित इस फोरम में भारत-जापान बिजनेस लीडर्स फोरम (IJBLF) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित दोनों देशों के उद्योग जगत की शीर्ष हस्तियां मौजूद रहीं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को “21वीं सदी की शक्ति” बताते हुए निवेश, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास गाथा जापानी निवेशकों के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रस्तुत करती है। मोदी ने भरोसा जताया कि राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान, सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता और कारोबारी सुगमता ने भारतीय बाजार को वैश्विक निवेशकों का भरोसेमंद गंतव्य बना दिया है।
-
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच सहयोग के पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया—
- विनिर्माण: बैटरी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और परमाणु ऊर्जा।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार: एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष व जैव प्रौद्योगिकी।
- हरित ऊर्जा: नवीकरणीय ऊर्जा व ऊर्जा संक्रमण।
- अगली पीढ़ी का इन्फ्रास्ट्रक्चर: हाई स्पीड रेल, लॉजिस्टिक्स और शहरी आवागमन।
- मानव संसाधन व जन-जन का संबंध: कौशल विकास व सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने भारतीय प्रतिभा और जापानी तकनीक के संयोजन को भविष्य की “सशक्त आपूर्ति श्रृंखला” का आधार बताया। उन्होंने तीन प्राथमिकताओं—पी2पी साझेदारी, हरित पहल व बाजार, और उच्च-उभरती प्रौद्योगिकियां (विशेषकर सेमीकंडक्टर)—पर जोर दिया।
इस अवसर पर आयोजित 12वें IJBLF की रिपोर्ट दोनों प्रधानमंत्रियों को भेंट की गई। वहीं जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JETRO) के अध्यक्ष नोरिहिको इशिगुरो ने इस्पात, एआई, अंतरिक्ष, शिक्षा व कौशल, स्वच्छ ऊर्जा और मानव संसाधन आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में कई B2B समझौता ज्ञापनों (MoUs) की घोषणा की। भारत-जापान आर्थिक फोरम से निकलकर स्पष्ट संदेश यही है कि एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आने वाले वर्षों में तकनीक, व्यापार और नवाचार की साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार हैं।
NAGARIK SATTA