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80 के दशक में फिल्म डिस्को डांसर से शुरू हुआ था डिस्को कल्चर
श्रीधर अग्निहोत्री
लखनऊ। देश में डिस्को म्यूज़िक की शुरुआत अस्सी के दशक में मानी जाती है, जब बप्पी लाहिड़ी के संगीत से सजी फिल्म ‘डिस्को डांसर’ रिलीज़ हुई। इस फिल्म का गीत “आई एम अ डिस्को डांसर” ऐसा सुपरहिट साबित हुआ कि वह पूरे देश में डिस्को कल्चर की पहचान बन गया। आज भी बहुत से दर्शक यही मानते हैं कि यह गीत शायद खुद मिथुन चक्रवर्ती या बप्पी लाहिड़ी ने गाया था, जबकि परदे के पीछे इस ऐतिहासिक गीत को आवाज़ दी थी उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) के विजय बेनेडिक्ट ने। मिथुन चक्रवर्ती की कई फिल्मों के लिए दर्जनों गीत गाने के बावजूद विजय बेनेडिक्ट को लंबे समय तक पहचान का संघर्ष झेलना पड़ा। यह बॉलीवुड की एक विडंबना ही रही कि जिन आवाज़ों ने सितारों को सुपरस्टार बनाया, वे खुद अक्सर गुमनामी में रहीं। बॉलीवुड में कई कलाकार आए और चले गए, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपनी कला से अमिट छाप छोड़ जाते हैं। 80 और 90 के दशक में अपनी दमदार और विशिष्ट आवाज़ के कारण विजय बेनेडिक्ट भी ऐसे ही एक अनोखे प्लेबैक सिंगर रहे। आमिर खान, मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॉफ और गोविंदा जैसे बड़े सितारों पर फिल्माए गए उनके गीत आज भी संगीत प्रेमियों की यादों में बसे हुए हैं।
विजय बेनेडिक्ट का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में एक उत्तर भारतीय ईसाई परिवार में हुआ था। उन्होंने इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक में ग्रेजुएशन और बिज़नेस मैनेजमेंट में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया। हालांकि उनकी पढ़ाई का रास्ता अलग था, लेकिन किस्मत उन्हें बॉलीवुड की चमकती दुनिया में ले आई।साल 1982 में आई फिल्म ‘डिस्को डांसर’ का टाइटल सॉन्ग उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस गाने ने न सिर्फ मिथुन चक्रवर्ती को डांसिंग आइकन बनाया, बल्कि विजय बेनेडिक्ट को भी रातोंरात स्टार सिंगर के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद उन्होंने ‘कसम पैदा करने वाले की’ (1984), ‘आंधी-तूफान’ (1985), ‘सदा सुहागन’ (1986), ‘डांस डांस’ (1987), ‘कमांडो’ (1988), ‘लव लव लव’ (1989), ‘नाचनेवाले गानेवाले’ (1990) और ‘प्यार का साया’ (1991) जैसी कई सफल फिल्मों में अपनी आवाज़ दी। उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आनंद-मिलिंद, नदीम-श्रवण और बप्पी लाहिड़ी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया।
करीब एक दशक तक सफलता के शिखर पर रहने के बाद 1991 में एक दर्दनाक घटना ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। जर्मनी में माफिया द्वारा उनके भाई की हत्या कर दी गई। इस हादसे ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। शोहरत, पैसा और कामयाबी भी उनके मन के खालीपन को भर नहीं सकीं। इसी दौर में उन्होंने आध्यात्मिक शांति की खोज शुरू की और मसीह के मार्ग को अपनाने का फैसला किया।इसके बाद विजय बेनेडिक्ट ने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया और खुद को पूरी तरह गॉस्पेल म्यूज़िक के लिए समर्पित कर दिया। आज वे एक सम्मानित गॉस्पेल सिंगर के रूप में जाने जाते हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक सफल गायक की नहीं, बल्कि उस इंसान की है जिसने शोहरत से आगे जाकर जीवन का गहरा अर्थ तलाशा।
NAGARIK SATTA
